Thursday, 5 April 2018

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जीवन

अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम (अंग्रेज़ी:Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam; जन्म: 15 अक्तूबर, 1931, रामेश्वरम; मृत्यु: 27 जुलाई, 2015शिलांग) जिन्हें डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के नाम से जाना जाता है, भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रसिद्ध वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में विख्यात थे। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई, 2002 से 25 जुलाई,2007 तक रहा। उन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। वह एक गैर राजनीतिक व्यक्ति रहे। विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण ही राष्ट्रपति भवनके द्वार उनके लिए स्वत: खुल गए। जो व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, उसके लिए सब सहज हो जाता है और कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता। अब्दुल कलाम इस उद्धरण का प्रतिनिधित्व करते नज़र आते थे। उन्होंने विवाह नहीं किया था। उनकी जीवन गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक की कहानी से कम नहीं है। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत था कि वह सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्ति नज़र आते थे। वह एक ऐसे स्वीकार्य भारतीय थे, जो सभी के लिए 'एक महान् आदर्श' बन चुके हैं। विज्ञान की दुनिया से देश का प्रथम नागरिक बनना कपोल कल्पना मात्र नहीं है, क्योंकि यह एक जीवित प्रणेता की सत्यकथा है।



द्वीपजैसा छोटा सा शहर प्राकृतिक छटा से भरपूर था। शायद इसीलिए अब्दुल कलाम जी का प्रकृति से बहुत जुड़ाव रहा था।

कलाम जी का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को धनुषकोडी गांव, रामेश्वरम, तमिलनाडु में मछुआरे परिवार में हुआ था, वे तमिल मुसलमान थे. इनका पूरा नाम डॉक्टर अवुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम है. इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था. वे एक मध्यम वर्गीय परिवार के थे. इनके पिता अपनी नाव मछुआरों को देकर घर चलाते थे. बालक कलाम को भी अपनी शिक्षा के लिए बहुत संघर्ष करना पढ़ा था. वे घर घर अख़बार बाटते और उन पैसों से अपने स्कूल की फीस भरते थे. अब्दुल कलामजी ने अपने पिता से अनुशासन, ईमानदारी एवं उदार स्वभाव में रहना सिखा था. इनकी माता जी ईश्वर में असीम श्रद्धा रखने वाली थी. कलाम जी के 3 बड़े भाई व् 1 बड़ी बहन थी. वे उन सभी के बहुत करीब रिश्ता रखते थे.

किशोरावस्था में अब्दुल कलाम

रामेश्वरम का प्राकृतिक सौन्दर्यसमुद्र की निकटता के कारण सदैव बहुत दर्शनीय रहा है। उनके पिता'जैनुलाब्दीन' न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। वे नाविक थे, और नियम के बहुत पक्के थे। उनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। उनके संबंध रामेश्वरम के हिन्दू नेताओं तथा अध्यापकों के साथ काफ़ी स्नेहपूर्ण थे। अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था।



एक विलक्षण व्यक्तित्व हमेशा के लिए अलविदा कह गया. भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे. शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा. आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं कर सके. 83 वर्ष केकलाम साथ छोड़ चुके थे .

एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था. एक मछुआरे का बेटा अखबार बेचा करता था. यह कलाम के जीवन का शुरुआती सफर था. वे देश के चोटी के वैज्ञानिक बने और फिर सबसे बड़े राष्ट्रपति पद को भी शोभायमान किया. वे करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे. अपनी वाक कला से हजारों की भीड़ को मंत्र-मुग्ध करते रहे. युवाओं में नया करने का जोश और हौसला भरते रहे. दो दर्जन किताबों में अपने अनुभव का निचोड़ पेश किया. लेकिन अंत तक ट्विटर प्रोफाइल पर खुद को एक 'लर्नर' बताते रहे.

ट्विटर पर उनका परिचय इस तरह है, 'साइंटिस्ट, टीचर, लर्नर, राइटर. भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में सेवाएं दीं. 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहा हूं.'

जानिए कलाम के बारे में 10 खास बातें:

1. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ.

2. पेशे से नाविक कलाम के पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे. ये मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे. पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे इसलिए शुरुआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम भी करना पड़ा.

4. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बचे उठते थे और नहा कर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे. सुबह नहा कर जाने के पीछे कारण यह था कि प्रत्येक साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे. ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और इसके बाद वो सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे.

5. कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताते हैं. वो कहते हैं, ‘वो हमारे अच्छे टीचर्स में से थे. एक बार उन्होंने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है? क्लास के किसी छात्र ने इसका उत्तर नहीं दिया तो अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए. वहां कई पक्षी उड़ रहे थे. कुछ समुद्र किनारे उतर रहे थे तो कुछ बैठे थे. वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को समझाया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार पूर्वक बताया जो उड़ने में सहायक होता है. उनके द्वारा समझाई गई ये बातें मेरे अंदर इस कदर समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होने लगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर हूं और उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी. बाद में मैंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना करियर बनाउं. मैंने बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की.’

6. 1962 में कलाम इसरो में पहुंचे. इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया. 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया. उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं.

7. 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे. इस दौरान वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया. कलाम ने विजन 2020 दिया. इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई. कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे.

8. 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया. उसी दौरान अन्ना यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया. कलाम ने तब रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया. स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई.

9. इसके पहले चरण में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल बनाने पर जोर था. दूसरे चरण में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल, टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहिकल (रेक्स) बनाने का प्रस्ताव था. पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए गए. कलाम ने अपने सपने रेक्स को अग्नि नाम दिया. सबसे पहले सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का परीक्षण किया गया. इसके बाद 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई. ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र कहीं भी दागी जा सकती है. इस सफलता के साथ ही कलाम को मिसाइल मैन के रूप में प्रसिद्धि मिली और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

10. कलाम को 1981 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया. भारत के सर्वोच्च पर पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया.

सत्तर और अस्सी के दशक में अपने कार्यों और सफलताओं से डॉ कलाम भारत में बहुत प्रसिद्द हो गए और देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में उनका नाम गिना जाने लगा। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गयी थी की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने कैबिनेट के मंजूरी के बिना ही उन्हें कुछ गुप्त परियोजनाओं पर कार्य करने की अनुमति दी थी।

भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का प्रारम्भ डॉ कलाम के देख-रेख में किया। वह इस परियोजना के मुख कार्यकारी थे। इस परियोजना ने देश को अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें दी है।

जुलाई 1992 से लेकर दिसम्बर 1999 तक डॉ कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सचिव थे। भारत ने अपना दूसरा परमाणु परिक्षण इसी दौरान किया था। उन्होंने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आर. चिदंबरम के साथ डॉ कलाम इस परियोजना के समन्वयक थे। इस दौरान मिले मीडिया कवरेज ने उन्हें देश का सबसे बड़ा परमाणु वैज्ञानिक बना दिया।

वर्ष 2011 में प्रदर्शित हुई हिंदी फिल्म ‘आई ऍम कलाम’ उनके जीवन से प्रभावित है।

शिक्षण के अलावा डॉ कलाम ने कई पुस्तकें भी लिखी जिनमे प्रमुख हैं – ‘इंडिया 2020: अ विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘विंग्स ऑफ़ फायर: ऐन ऑटोबायोग्राफी’, ‘इग्नाइटेड माइंडस: अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’, ‘मिशन इंडिया’, ‘इंडोमिटेबल स्पिरिट’ आदि।

पुरस्कार और सम्मान

देश और समाज के लिए किये गए उनके कार्यों के लिए, डॉ कलाम को अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। लगभग 40 विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया।
इस महान पुरुष  का जितना बखान किया जाये उतना कम है
इनकी  आलोचना करने वाला जिंदगी में कोई नहीं मिलेगा
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Wednesday, 4 April 2018

दो शब्द Er richpal rokna के नाम

मेरे प्यारे रिछपाल रोकणा

सबसे पहले तो तुम्हें मेरा यह फिटे लांत

चुतिया सोच सपना IAS
कहां से होगा सक्सेस
जिसकी चुतिया सोच  चुतिया  औकात
वही करेगा चुतिया बात


 एक होती है लोल
 एक होती है बगलोल
एक होती है रबड़ लोल
लोल हर जगह देखने को मिलती है बगलोल कहीं कहीं देखने को मिलती है
रबड़ लोल बड़ी मुश्किल से ढूंढने पर एक गांव में एक मिलती है
और उसी रबडलोल का नाम है
Er richpal rokna

पहले तू यह बता तेरी किस किस के साथ बनती है किसके साथ बना कर रखी है तूने
 पहले अपने गिरेबान में झांक उस
 उसके बाद दूसरों के गेट बंद करने की बात कर


दूसरों में कमियां निकालते हो खुद एक टीचर होकर bhai की स्पेलिंग सही नहीं लिख सकते
 ढकनी में नाक दबा कर मर जाओ
तु जिस फ्लेक्स में भीम के नाम मे मात्रा गलत बता रहा है वह फ्लेक्स वाले की गलती है




 ना की भीम समर्थकों की फ्लेक्स वाला तेरे जैसा ही होगा
तुम वार्ड पंच के लायक भी नहीं हो



Tuesday, 3 April 2018

दलित संगठनों का भारत बंद: बीजेपी का बड़ा नुकसान बन जाएगा एससी-एसटी एक्ट

जय भीम साथियों
2 अप्रैल को भारत बंद के मौके पर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है. बिहार से लेकर झारखंड तक, मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक, पंजाब से लेकर यूपी तक हर जगह हिंसा और आगजनी देखने को मिल रही है. राज्य अलग-अलग लेकिन, हर जगह की तस्वीर एक जैसी. हो-हंगामा, कहीं पुलिस के साथ झड़प तो कहीं बंद समर्थक और विरोधी गुटों के बीच झड़प. आगजनी, तोड़फोड़ और हंगामे ने पूरे देश भर में बवाल मचाया हुआ है. मध्य प्रदेश में तो बंद के दौरान हुई हिंसा में कई मौत भी हो गई है.

देशभर के दलित संगठनों की तरफ से बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला. दलित संगठनों का बंद सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश दिया गया था. अबतक इस तरह के केस में अग्रिम जमानत नहीं मिलती थी. लेकिन, कोर्ट ने इस तरह के मामले में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी देने का आदेश दिया. यानी अब पुलिस को भी आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले इन मामलों की जांच करनी पड़ेगी.

क्या बदलाव हुए हैं कानून में

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के मामले में था. लेकिन, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर गैर-सरकारी किसी कर्मी से जुड़ा इस तरह का मामला सामने आए तो फिर उस मामले में सबसे पहले उस जिले के एसएसपी से मंजूरी लेनी पड़ेगी, तभी आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकेगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दलितों के हितों के संरक्षण को लेकर बनाए गए कानून अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कमजोर होने की बात कही जा रही है. खासतौर से दलित संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से दलितों की आवाज दबाई जाएगी. दलित संगठनों का गुस्सा इसी बात को लेकर है.
. सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद से ही कांग्रेस समेत कई दूसरे दलों ने सरकार पर इस मामले में ठीक तरह से अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखने का आरोप लग रहा है. कोशिश मोदी सरकार को दलित विरोधी बताने की हो रही है


Bharat Bandh Today UPDATES:

– बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें रोक दी और हंगामा किया। बेतिया स्टेशन पर समर्थकों ने तोड़फोड़ की तथा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफरपुर सहित विभिन्न जिलों में लोग सड़क जामकर सड़कों पर आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। बेतिया में बंद समर्थकों ने एक पेट्रोल पंप में तोड़फोड़ की।

– दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विभिन्न दलित संगठनों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्पन्न हुई स्थिति पर ‘आप’ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय का समर्थन करती है। केंद्र सरकार को अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका के लिए प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ वकीलों की मदद लेनी चाहिए।”
मनुस्मृति क्यों जलाई गई पढें
– मध्‍य प्रदेश के आईजी (कानून-व्‍यवस्‍था) ने मीडिया से 4 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। उन्‍होंने घायलों की संख्‍या स्‍पष्‍ट नहीं की। आईजी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।



– बसपा सुप्रीमो मयावती ने कहा कि मैं एससी / एसटी एक्ट के खिलाफ विरोध का समर्थन करती हूं।

– हरियाणा के यमुनानगर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया है। दरअसल काफी प्रदर्शनकारी एक साथ सड़क पर आ गए थे, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया।



– प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में गुरुग्राम एक्सप्रेस वे को ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी गुरुग्राम के सदर बाजार में भी रैली निकाल रहे हैं। >सुप्रीम कोर्ट में SC/ST एक्ट में बदलाव पर लिए गए फैसले का तत्काल रिव्यू करने से मना कर दिया है।

– भिंड के पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे ने कहा कि भिंड जिले में सेना को बुलाया गया, जहां प्रदर्शनकारियों द्वारा गोलीबारी में छह लोग घायल हो गए। सेना और अर्धसैनिक बलों को पंजाब में एहतियाती तौर पर स्टैंडबाय पर रहने के लिए कहा गया है।

– यूपी के आजमगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने यूपी रोडवेज की बस को आग के हवाले कर दिया। पहले बस में तोड़ फोड़ की गई। बस के सारे शीशे तोड़ दिए और फिर बस में आग लगा दी।

– भारत बंद से जुड़े प्रदर्शन हिंसक होते जा रहे हैं। मप्र के ग्वालियर में अब तक 19 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें दो की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। शाम छह बजे तक के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। (फोटोः एएनआई)

– मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एससी/एसटी प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान गोलियां चल गईं। बीच बाजार में एक शख्स पिस्तौल से गोली चलाता देखा गया, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल पनप गया।

– गुजरात के कच्छ स्थित गांधीधाम में भी आगजनी की गई। भारी संख्या में जुटकर दलित महिला ने भारत बंद का समर्थन किया। कच्छ में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ कर दी है। कच्छ में महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। वह सड़को पर ही बैठ गई हैं। इसके अलावा कच्छ के गांधीधाम में ही प्रदर्शनकारियों ने आग लगाकर भी विरोध प्रदर्शन किया है।

– होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि “हमने सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर की है। मैं सभी राजनीतिक दलों और समूहों से शांति बनाए रखने और हिंसा नहीं भड़काने के लिए अपील करता हूं।”

– गाजियाबाद में भी प्रदर्शन का असर देखने को मिल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। यूपी के हापुड़ में कार फूंकी। इसके अलावा उत्तराखंड के देहरादून में प्रदर्शनकारियों ने जाकर जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद कराईं। मध्य प्रदेश के ग्वालिय के चार थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लग गया है। वहीं मेरठ में भी प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस चौकी फूंक दी है। मध्य प्रदेश में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए।

– जयपुर में प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। जयपुर एक शोरूम में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोक कर दी। शोरूम का शीशा तोड़ दिया। इसके अळावा जयपुर में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर उसके सामने खडे़ होकर और ट्रेन के इंजन पर चढ़कर प्रदर्शन किया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मध्यप्रदेश के मुरैना में भी रेलवे ट्रेक को ब्लॉक कर दिया है।



– रांची में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क जाम कर रहे थे। पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी इसी को लेकर दोनों के बीच भिडंत हो गई।

– सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब राजस्थान में भी विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है। गाड़ियों समेत दूसरी प्रॉपर्टी फूंक दी हैं। इसके अलावा राजस्थान के ही भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं।

– मेरठ में हिंसक हुआ SC/ST एक्ट को लेकर विरोध प्रदर्शन। यूपी के मेरठ में भारत बंद को लेकर रोड पर तोड़फोड़। रोड पर जा रही होंडा सिटी और i20 कार के शीशे तोड़े। लोगों को चोट भी आई। दिल्ली के मंडी हाउस पर भी हो रहा भारत बंद को लेकर विरोध प्रदर्शन।

– यूपी के आगरा में प्रदर्शनकारियों ने लगाया जाम। इसके अलावा राजस्थान के भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं। वह लाठी डंडों के साथ सड़क पर बैठी हैं। पंजाब के अमृतसर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री थावर चंद्र गहलोत ने कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं तब तक एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों से कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता।

SC/ST एक्ट को लेकर बिहार के आरा में CPIML समेत कई संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी। इसके रेलवे फाटक पर टायर डालकर आगजनी भी की। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने बिहार के सोनापुर में रोड ब्लॉक कर दी। भारत बंद का भोजपुर में भी असर दिख रहा है। यहां सड़कों पर सन्नटा पसरा हुआ है। सभी दुकानें बंद हैं और परिचालन भी ठप हो गया ह‍

एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित संगठनों ने सोमवार को देशभर में प्रदर्शन किया, धीरे-धीरे यह हिंसक होता चला गया. भारत बंद के आह्वान पर देश के अलग-अलग शहरों में दलित संगठन और उनके समर्थकों ने ट्रेन रोकीं और सड़कों पर जाम लगाया. उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में तोड़फोड़, जाम और आगजनी की घटनाएं सामने आई, लेकिन जान-माल का काफी नुकसान भी हुआ.

देशभर में भड़की हिंसा में एक बच्चे समेत 11 लोगों की जान चली गई. मध्यप्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में दिनभर स्थिति बेहद खराब रही और लोगों ने जमकर हंगामा किया. विरोध प्रदर्शन के कारण एमपी में 7, उत्तर प्रदेश में 2 और राजस्थान में 1 व्यक्ति की मौत हो गई. बाडमेर में एक हिंसक झड़प में 25 लोग घायल हो गए.

दूसरी ओर, बिहार में भारत बंद के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में 3,619 लोगों को गिरफ्तार किया गया. गाजियाबाद में हंगामे को देखते हुए सभी स्कूलों में मंगलवार (3 अप्रैल) को छुट्टी कर दी गई है.



देश के कई शहरों में पुलिस थानों को भी निशाना बनाया गया है. साथ ही सरकारी वाहनों में आगजनी की गई. प्रदर्शनकारियों के बवाल के चलते कई रूट पर ट्रेनें चल नहीं पाईं. साथ ही कई हाईवे घंटों तक जाम रहे.

ध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार (2 अप्रैल) को भारत बंद के समर्थन में बोले। उन्होंने इसी के साथ सड़क पर उतरने वाले दलितों को सलाम किया। उन्होंने कहा, "दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डीएनए में है। जो इस सोच को चुनौती देता है, उसे वे हिंसा से दबाते हैं।" कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, "हजारों दलित भाई-बहन आज सड़क पर उतरकर नरेंद्र मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग उठा रहे हैं। हम उन सभी को सलाम करते हैं।" आपको बता दें कि दलित संगठनों ने आज (2 अप्रैल) भारत बंद बुलाया है। ऐसा एससी-एसटी एक्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसले को लेकर हुआ है। छह राज्यों में बड़े स्तर पर इसका असर देखने को मिला, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में हिंसक प्रदर्शन भी हुए। खबर लिखे जाने तक 5 की मौत और 30 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी है।

पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) मकरंद देऊस्कर ने बताया, ‘बंद प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में ग्वालियर में दो, भिण्ड में एक और मुरैना में एक व्यक्ति की मौत हो गई.’

उन्होंने बताया कि मरने वाले लोगों की पहचान राकेश जाटव, दीपक जाटव (ग्वालियर), महावीर राजावत (भिण्ड) और राहुल पाठक (मुरैना) के तौर पर हुई है
जय भीम  जय भारत 

Sunday, 1 April 2018

2 अप्रैल के भारत बंद को 22 संगठनों का समर्थन

जय भीम  जय भारत
एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के कुछ प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के विरोध में भीम आर्मी ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया है। प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक राज ने कहा कि एससी-एसटी सहित ओबीसी के 22 संगठनों ने बंद का समर्थन किया है। इसकी सफलता के लिए संत रविदास आश्रम में बैठक हुई। मांग की गई कि निष्प्रभावी किए गए प्रावधानों को फिर से लागू कराया जाए, ताकि एससी-एसटी को न्याय मिल सके। बैठक में अमरजीत कुमार राम, त्रिलोकी मांझी, सुरेंद्र महान, विनोद कुमार मरांडी, चंदन कुमार, मनोज कुमार, दिनेश कुमार आदि मौजूद थे।

SC-ST एक्ट में बदलाव के खिलाफ लोग उतरेंगे सड़कों पर, 2 अप्रैल को भारत बंद का किया एलान
 तमाम सामाजिक संगठन, दलित संगठन और दलित समाज से जुड़े लोगों ने दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है। इनका आरोप है कि SC-ST अत्याचार निरोधक अधिनियम को कमजोर किया गया है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में कुछ बड़े बदलाव किए।

कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता दो अप्रैल को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने वाले हैं। वरिष्ठ पत्रकारदिलीप मंडल ने अपनी फेसबुक डीपी बदलकर इस प्रदर्शन का समर्थन किया है।


छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एससी-एसटी एक्ट मामला समेत जिले की 16 सूत्री मांगों को लेकर आगामी 2 अप्रैल को कांग्रेस की विशाल रैली है. आपको बता दें कि कांग्रेस की रैली में कांग्रेस उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा समेत बस्तर के विधायक भी शामलि होंगे.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने के विरोध में कई सामाजिक संगठन सामाने आ गए हैं. संशोधन को समाप्त कर एक्ट को पहले की भांति रखने की मांग की जा रही है. अनुसूचित जाति और अनुसचित जनजाति के लोग इस एक्ट को शिथिल करने के विरोध में आगामी 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है.

वहीं मामले में उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा भी भारत बंद का समर्थन करते हुए क्षेत्र की 16 अन्य मांगों को लेकर जिला मुख्यालय में रैली और महासभा का आयोजन रखा है. इसमें बस्तर संभाग के विधायक समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. कवासी लखमा का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है.

उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा का कहना है कि आगामी 2 अप्रैल को सबसे पहले बस्तर संभाग के सुकमा जिले में कांग्रेस की विशाल रैली का आयोजन होगा. इसमें वे राज्यपाल के नाम से जिले के 16 सूत्री मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपेगे.

दो अप्रैल को बंद कराया जाएगा केयू

कुरुक्षेत्र। एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया है। इसी को लेकर शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय के डॉॅ. भीम राव अंबेडकर स्टडी सेंटर में अंबेडकरवादी छात्र संगठनों, डॉ. अंबेडकर अनुसूचित कर्मचारी संघ, डॉ. अंबेडकर अनुसूचित शिक्षक संघ की सामूहिक बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया की भारत बंद को ध्यान में रखते हुए विश्विद्यालय को बंद कराया जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाते हुए जवाहर लाल नेहरू लाइब्रेरी के सामने शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन करते हुए विश्विद्यालय बंद कराया जाएगा। इसके साथ ही डॉ. आंबेडकर चौक तक रोष मार्च निकाला जाएगा। इस मौके पर अंबेडकरवादी छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, कर्मचारी संघ, शिक्षक संघ के पदाधिकारी मौजूद थे।



 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के संबंध में उच्चत्तम न्यायालय के फैसले के विरोध में संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है। समिति के प्रधान कुलवंत सिंह भरोमाजरा ने आज अन्य संगठनों के नेताओं सहित एक संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि डा. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के उत्थान को ध्यान में रख कर भारत के संविधान का निर्माण किया था। 
उन्होंने कहा कि केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी साजिश के तहत संविधान की धाराओं के साथ छेड़छाड़ कर रही है जिसके कारण देश भर में डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर बनी दलित सभाओं में भारी रोष उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उच्चत्तम न्यायालय ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो दो अप्रैल को देश भर में बंद कर शांतिमय धरना- प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने सभी राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक तथा व्यापारिक संगठनों से भारत बंद को सफल बनाने की अपील की है।  इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष महिन्द्र सिंह, वरिष्ठ उपप्रधान संत देस राज गोविंदपुरा, महासचिव निर्मल सिंह, अखिल भारतीय आदि मिशन पंजाब के प्रधान मदन लाल रंधावा, अंबेडकर सेना और सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान चंदन ग्रेवाल उपस्थित थे। 
सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ सोमवार को घोषित भारत बंद का कई संगठनों ने समर्थन किया है. इसके तहत कई पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतरेंगे. संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पूर्व की तरह लागू किया जाए.
SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ खड़े हुए झारखंड के दर्जनों संगठन, 2 अप्रैल को भारत बंद, अलर्ट जारी
 एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों को शिथिल करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों और उससे जुड़े संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया है. बंद को झारखंड के दर्जनों सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल गया है. रविदास जयंती पर आयोजित होने वाले इस भारत बंद को लेकर खुफिया विभाग ने झारखंड सरकार को अलर्ट किया है.

आदिवासी छात्र संघ, रांची विश्वविद्यालय के अध्‍यक्ष संजय महली ने कहा है कि 2 अप्रैल का बंद ऐतिहासिक होगा. बंद को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार कर ली गयी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए छोटे-छोटे समूह बनाये गये हैं,  जो विभिन्‍न इलाकों में बंद को सफल बनाने के लिए सड़क पर उतरेंगे.
2  अप्रैल को भारत बंद में शामिल होगी नगर निगम सफाई मजदूर यूनियन
नगर निगम सफाई मजदूर यूनियन (रजि.) फगवाड़ा ने एस.सी./एस.टी. एक्ट के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए फैसले के रोष स्वरूप 2 अप्रैल को विभिन्न संगठनों द्वारा किए जा रहे भारत बंद में शामिल होने का ऐलान किया है।

यहां नगर निगम कमिश्नर को इस हड़ताल संबंधी लिखित पत्र देकर अवगत करवाने के उपरांत यूनियन के प्रधान रोशन लाल सेठी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय का एस.सी./एस.टी. एक्ट को लेकर दिया गया फैसला पीड़ादायक है। इसके खिलाफ सख्त कानून बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि उक्त हड़ताल में सफाई मजदूर यूनियन के अलावा म्यूनिसिपल सफाई कर्मचारी यूनियन इंटक भी शामिल होगी। 
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Saturday, 31 March 2018

SC/ST एक्ट: सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से नाखुश भाजपा के दलित सांसद, उठाई ये मांग

। बीजेपी के दलित सांसद सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कड़े प्रावधानों को कम करने के कारण नाराज हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के दलित सांसदों ने बुधवार को सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत से मुलाकात की है और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस मामले को उठाने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक, एक मंत्री सहित कई दलित सांसदों ने सरकार से न्यायालय में एक समीक्षा याचिका दायर करने को कहा


दलित समाज हुआ एकजुट

सांसद और भाजपा के एससी सेल के प्रमुख विनोद कुमार सोनकर ने कहा कि, यह संशोधन परेशान करने वाले लोगों को सजा से बचाएगा। भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी के दलित सांसद बहुत परेशान हैं। अब केवल एक चीज बचाी है एससी और एसटी के आरक्षण को खत्म करना। मुझे डर है कि फिलहाल चीजें उस दिशा में आगे बढ़ रही हैं




दलित समाज ने एससी/एसटी एक्ट में संसोधन को लेकर एकजुट हो गया है. इसी कड़ी में समाज के लोगों ने दादरी के रोज गार्डन में मीटिंग कर रोष प्रदर्शन किया. साथ ही निर्णय लिया कि दो अप्रैल को भारत बंद में दलित समाज बढ़चढक़र भाग लेगा. दलित समाज ने केंद्र सरकार को आगाह किया कि एक्ट में संसोधन वापिस नहीं लिया तो देशभर में एकजुटता दिखाते हुए आंदोलन शुरु किया जाएगा.

दलित समाज के अध्यक्ष जगदीश राय की अध्यक्षता में रोज गार्डन में बैठक आयोजित की गई. बैठक में दलित नेताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि एससी-एसटी कानून में संशोधन कर उनके समाज के साथ अन्याय किया हैय केंद्र सरकार द्वारा संशोधन को वापिस लेना चाहिए.

इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान संबोधित करते हुए दलित नेता जगदीश राय व जसवंत कलियाणा ने संयुक्त रूप से कहा कि दो अपै्रल को भारत बंद के साथ ही दादरी में विरोध रैली होगी. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किया है जिसका वो विरोध करते हैं.
जाने sc st act के बारे में

इसी फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को भारत बंद करने का आह्वान किया गया है. साथ ही इसके विरोध में दो अपै्रल को दादरी में सैकडों की सख्या में एससी और एसटी समाज के लोग एकत्रित होंगे और रोष प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचेंगे. प्रदर्शन के बाद डीसी को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा. दलित नेताओं ने अल्टीमेटम दिया कि अगर एक्ट में किए संसोधन को वापिस नहीं लिया तो देश भर का दलित समाज बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा.

Friday, 30 March 2018

SC-ST एक्ट के खिलाफ जारी फरमान पर एकजुट हुआ दलित समाज

जय भीम साथियों
उत्तर प्रदेश में बहराइच से बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने अब पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. उनका कहना है कि पार्टी में दलितों पिछड़ों के साथ इंसाफ नहीं हो रहा इसलिए वह एक अप्रैल को लखनऊ में रैली करेंगी. वह इस मुहिम में मायावती से भी जुड़ने को तैयार हैं. उधर, यूपी सरकार में सहयोगी दल के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी फिर सरकार के कामकाज़ से नाराज़गी जताई है. 

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सरकार में भी खलबली है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका दाख़िल करने की अर्ज़ी को लेकर एनडीए के सभी दलित सांसद पीएम नरेंद्र मोदी से संसद में मुलाकात करेंगे. कांग्रेस भी सरकार से इस फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका देने की मांग कर रही है. वहीं राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग आज राष्‍ट्रपति से मिलेगा और उसने पीएम मोदी से भी मिलने के लिए समय मांगा है. 

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति( अत्याचार निवारण) अधिनियमके संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर केन्द्र सरकार से तत्काल पुनरीक्षण याचिका दायर करने की मांग  की है.


सेवा में
          सर्व श्री, 

1-उदित राज
2-प्रो0 राम शंकर
3-साध्वी सावित्री बाई फूले
4-कमलेश पासवान
5-श्रीमति प्रियंका सिंह रावत
6-अशोक कुमार दोहरे
7-अंशुल वर्मा
8-राजेश कु0 दिवाकर
9-भानु प्रताप सिंह
10-विनोद कुमार सोनकर
11-श्रीमती नीलम सोनकर
12-श्रीमती अंजू बाला 
13-कौशल किशोर
14-डॉ0 यशवंत सिंह

समस्त एस०सी०/एस०टी० सांसद, भारत सरकार

विषय:-117वॉ संविधान संशोधन (प्रोन्नति में आरक्षण बिल) लोकसभा में पास कराओ या इस्तीफा दो

महोदय/महोदया
             आपको भली भांति अवगत है कि 117 वां संविधान संसोधन बिल राज्य सभा से पारित हो चुका है और लोक सभा में लम्बित है।जब कि यह बिल 1995 से लम्बित था आप जिस पार्टी से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उस सरकार ने अपनी दलितविरोधी मानसिकता का उदाहरण दे दिया है।
   आप यूपी से लोक सभा की उन सीटों से सांसद है जो भारत के संविधान में उल्लेखित प्रतिनिधत्व अधिकार पर संरक्षित है इसलिए आज आप सांसद है और संसद मे दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं किन्तु आप अपने दलित समाज के अधिकारो के लिए संसद मे आवाज क्यों नहीं उठाते हो।
         आप की सरकार पूर्ण बहुमत की सरकार है आप सभी दलित सांसद सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाते हो। ऐसी क्या मज़बूरी है की आप सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री को इस्तीफा क्यों नही सौंप देते है क्यों आप सक्रिय भूमिका नहीं अपनाते हो??
       आप भी बाबा साहेब को धोखा दे रहे हो। आप समाज के प्रति ज़िम्मेदार नहीं हो। आप ने आरक्षण के बल पर सांसदी तो ले ली लेकिन आप उन लाखों लोगों की ओर नहीं देख रहे हैं जो आप की निष्क्रियता के कारण तमाम कानूनी/ सरकारी बाध्यताओं को झेलने को मजबूर है कुछ तो शर्म करो।
       यदि आप सक्रिय भूमिका नहीं अदा कर सकते तो आप या तो बिल पास कराओ या समाज के लोगो के बीच मत जाओ। आप का समाज के लोग इस्तीफा मांग रहे हैं आप चुन सकते हैं 

सांसदी या समाज। 

वर्ना वो दिन दूर नही जब समाज के लोग बहिष्कार करंगे।
   अतः आप से आग्रह है कि 117वॉ संविधान संशोधन बिल पास कराओ या इस्तीफा दो। 


" इस मैसेज को इतना शेयर करें कि सभी दलित सांसदों तक पहुँच जाये।


फूलन देवी एक ऐसी साहसी महिला थी जिसके कारण ही sc st एट्रोसिटी कानून बना था..उसने 22 राजपूत लोगो की गर्दन काटकर अपने साथ हुए रेप का बदला लिया था.........
ईसी कारण ये कानून राजीव गांधी ने बनवाया था वो सरकार डर गई थी की कही ऐसा ना हो की sc/st के लोग मारने काटने पर उत्तर जाए.....
इतिहास गवाह हे जब जब अपने लोगो ने अपनी ताकत दिखाई है...इतिहास ही बदल दिया है....पर हमारे लोग सो रहे हे अभी...
जब एक महिला इतना साहस कर सकती है तो देश के 20 करोड़ sc और 10 करोड़ st क्या कर रहे है..



 एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गई है. जब से यह फैसला आया है, तब से कांग्रेस इस फैसले से नाराज चल रही है. मगर अब कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी की नेतृत्व में संसद परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और सरकार से एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की. इस दौरान नारे लगाए जा रहे थे- दलितों के सम्मान में, राहुल गांधी मैदान में. बताया जा रहा है कि इस कानून को कानून को हल्का बनाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी नाराज चल रही है, बल्कि बीजेपी के भी दलित नेता नाराज चल रहे हैं. 






एससी-एसटी एक्ट में फौरन गिरफ्तारी ना करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस ने इसको लेकर सीधा केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। शुक्रवार को संसद में विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने ठीक तरीके से कोर्ट में पक्ष नहीं रखा।

एससी-एसटी एक्ट पर रिव्यू पेटिशन की मांग
संसद परिसर में गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस नेताओं ने एससी-एसटी एक्ट पर सरकार से रिव्यू पेटिशन दाखिल करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने यह नारे लगाए- ‘दलितों के सम्मान में, राहुल गांधी मैदान में।’
जय भीम जय भारत 
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Thursday, 29 March 2018

मनुस्मृति के विचार

जय भीम  जय भारत
मनुस्मृति क  विचार
इससे पहले की हम मनुस्मृति क्यों जलाई गयी को जाने, मनुस्मृति का मकसद जान लेते हैं, मनुस्मृति संविधान इसलिए लिखा गया था की हारे हुए बौद्ध/राक्षश/असुर/दलित  फिर दोबारा संगठित होकर सर न उठा पाएं, उनका परमानेंट गुलाम बनाने का ग्रन्थ है मनुस्मृति, आईये मनुस्मृति पर ओशो जी के विचार से शुरू करते हैं
sc st act के बारे में जानें
 मै कहता हूं
 मनुस्मृति दहन भूमि। – ब्राहम्णवाद को दफनाओ। – छुआछूत को नष्ट करो । 

मनुस्मृति क्यों जलाई गई पढें
“ गरीब आदमी तो क्रांति की कल्पना भीनहीं कर सकते क्योंकि उसको तो किसी भीप्रकार कि शिक्षा की अनुमति ही नहीं दी गई.उसे अपने से उपर के तीन वर्णों से किसी भीसंपर्क से मना कर दिया गया वो शहर केबाहर रहता है वो शहर के अंदर नहीं रहसकता.गरीब लोगों के कुँए इतने गहरे नहीं हैं वे कुँए बनाने में ज्यादा पैसा नहीं डाल सकतेहैं. व्यवसायियों के पास अपने बड़े और गहरेकुँए है और राजा के पास अपने कुँए है ही। अगर कभी बारिश नहीं आए और उसके कुँएसूख रहे होते हैं, तो भी शूद्र को अन्य किसीके कुएं से पानी लेने की अनुमति नहीं है उसको किसी नदी से पानी लाने के लिए दसमील दूर जाना पड़ सकता है. वो इतना भूखाहै की दिन मे एक बार के भोजन का प्रबंधनकरना भी मुश्किल है |उसको कोई पोषणनहीं मिलता,वे कैसे क्रांति के बारे में सोचसकते हैं? वह यह जानता है कि कि यहीउसकी किस्मत है: पुजारी ने उनको यहीबताया है यही उनकी मानसिकता में जड़ करगया है|“इश्वर ने आप को अपने पर भरोसादिखाने का मौका दे दिया है. यह गरीबी  कुछभी नहीं है, यह कुछ वर्षों के लिए ही है,आपवफादार रह सकते हैं तो आपको महान फ़लमिलेगा”| तो एक तरफ़ तो पुजारी किसी भीपरिवर्तन के खिलाफ उन्हें ये उपदेश देताजाता है है, और दूसरी तरफ वे परिवर्तन करभी नहीं सकते क्योकि वे कुपोषण काशिकार हैं. और आप के लिये एक बातसमझने की है कि कुपोषित व्यक्ति बुद्धि बलखो देता है. बुद्धि बल वहीँ खिलता है जहाँ वोसब कुछ होता है है जिसकी शरीर कोजरूरत है,इतना ही नहीं इसके साथ साथ‘कुछ और’ भी चाहिए. ये जो ‘कुछ और’और है यही तो बुद्धि हो जाता है,बुद्धि एकलक्जरी है. एक दिन में केवल एक बारभोजन करने वाला व्यक्ति के पास कुछ भीनहीं है, बुद्धि विकसित करने के लिए उस्केपास कोई ऊर्जा नहीं है. यह बुद्धिजीवी वर्ग हैजो विचारों, नए दर्शन, जीवन के नए तरीके,भविष्य के लिए नए सपने बनाता है| लेकिनयहाँ बुद्धिजीवि तो शीर्ष पर पहले से ही है.वास्तव में भारत मे जबरदस्त महत्व का कामकिया गया है विश्व का कोई अन्य देश इतनासक्षम नहीं है कि  इस तरह के किसीवैज्ञानिक तरीके से यथास्थिति बनाए रखें.और आप हैरान होंगे ये एक आदमी ने किया,वो मनु था. हजारों साल बाद उसके सूत्रअभी भी  वास्तव में वैसे के वैसे पालन कियेजा रहे हैं|” … ओशो रजनीश. Book Title: The Last Testament, Vol. 2.       //  Chapter 6: The Intelligent Way
मनुस्मृति का इतिहास
कहने वाले कहते हैं कि आज मनुस्मृति को कौन जानता और मानता है, इसलिए अब मनु स्मृति पर हाथ धो कर पड़ने से क्या फायदा- यह एक मरे हुए सांप को मारना है. हमारा कहना है कि कई सांप इतने जहरीले होते हैं कि उन्हें सिर्फ मारना ही पर्याप्त नहीं समझा जाता बल्कि उसके मृत शरीर से निकला जहर किसी को हानि न पहुंचा दे इसलिए उसे जलाना भी पड़ता है.
वैसे मनु स्मृति जैसी घटिया किताब कि तुलना बेचारे सांप से करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा. बेचारे सांप तों यूँ ही बदनाम हैं, और अधिकाँश तों यूँ ही मार दिए जाते हैं. फिर भी सांप के काटने से एकाध आदमी ही मरता हैं जबकि मनु स्मृति जैसे ग्रन्थ तों दीर्घकाल तक पूरे समाज को डस लेते हैं. क्या ऐसे कृतियों की अंत्येष्टि यथासंभव किया जाना अनिवार्य नहीं हैं?