Wednesday, 4 April 2018

दो शब्द Er richpal rokna के नाम

मेरे प्यारे रिछपाल रोकणा

सबसे पहले तो तुम्हें मेरा यह फिटे लांत

चुतिया सोच सपना IAS
कहां से होगा सक्सेस
जिसकी चुतिया सोच  चुतिया  औकात
वही करेगा चुतिया बात


 एक होती है लोल
 एक होती है बगलोल
एक होती है रबड़ लोल
लोल हर जगह देखने को मिलती है बगलोल कहीं कहीं देखने को मिलती है
रबड़ लोल बड़ी मुश्किल से ढूंढने पर एक गांव में एक मिलती है
और उसी रबडलोल का नाम है
Er richpal rokna

पहले तू यह बता तेरी किस किस के साथ बनती है किसके साथ बना कर रखी है तूने
 पहले अपने गिरेबान में झांक उस
 उसके बाद दूसरों के गेट बंद करने की बात कर


दूसरों में कमियां निकालते हो खुद एक टीचर होकर bhai की स्पेलिंग सही नहीं लिख सकते
 ढकनी में नाक दबा कर मर जाओ
तु जिस फ्लेक्स में भीम के नाम मे मात्रा गलत बता रहा है वह फ्लेक्स वाले की गलती है




 ना की भीम समर्थकों की फ्लेक्स वाला तेरे जैसा ही होगा
तुम वार्ड पंच के लायक भी नहीं हो



Tuesday, 3 April 2018

दलित संगठनों का भारत बंद: बीजेपी का बड़ा नुकसान बन जाएगा एससी-एसटी एक्ट

जय भीम साथियों
2 अप्रैल को भारत बंद के मौके पर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है. बिहार से लेकर झारखंड तक, मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक, पंजाब से लेकर यूपी तक हर जगह हिंसा और आगजनी देखने को मिल रही है. राज्य अलग-अलग लेकिन, हर जगह की तस्वीर एक जैसी. हो-हंगामा, कहीं पुलिस के साथ झड़प तो कहीं बंद समर्थक और विरोधी गुटों के बीच झड़प. आगजनी, तोड़फोड़ और हंगामे ने पूरे देश भर में बवाल मचाया हुआ है. मध्य प्रदेश में तो बंद के दौरान हुई हिंसा में कई मौत भी हो गई है.

देशभर के दलित संगठनों की तरफ से बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला. दलित संगठनों का बंद सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश दिया गया था. अबतक इस तरह के केस में अग्रिम जमानत नहीं मिलती थी. लेकिन, कोर्ट ने इस तरह के मामले में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी देने का आदेश दिया. यानी अब पुलिस को भी आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले इन मामलों की जांच करनी पड़ेगी.

क्या बदलाव हुए हैं कानून में

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के मामले में था. लेकिन, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर गैर-सरकारी किसी कर्मी से जुड़ा इस तरह का मामला सामने आए तो फिर उस मामले में सबसे पहले उस जिले के एसएसपी से मंजूरी लेनी पड़ेगी, तभी आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकेगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दलितों के हितों के संरक्षण को लेकर बनाए गए कानून अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कमजोर होने की बात कही जा रही है. खासतौर से दलित संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से दलितों की आवाज दबाई जाएगी. दलित संगठनों का गुस्सा इसी बात को लेकर है.
. सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद से ही कांग्रेस समेत कई दूसरे दलों ने सरकार पर इस मामले में ठीक तरह से अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखने का आरोप लग रहा है. कोशिश मोदी सरकार को दलित विरोधी बताने की हो रही है


Bharat Bandh Today UPDATES:

– बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें रोक दी और हंगामा किया। बेतिया स्टेशन पर समर्थकों ने तोड़फोड़ की तथा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफरपुर सहित विभिन्न जिलों में लोग सड़क जामकर सड़कों पर आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। बेतिया में बंद समर्थकों ने एक पेट्रोल पंप में तोड़फोड़ की।

– दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विभिन्न दलित संगठनों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्पन्न हुई स्थिति पर ‘आप’ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय का समर्थन करती है। केंद्र सरकार को अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका के लिए प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ वकीलों की मदद लेनी चाहिए।”
मनुस्मृति क्यों जलाई गई पढें
– मध्‍य प्रदेश के आईजी (कानून-व्‍यवस्‍था) ने मीडिया से 4 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। उन्‍होंने घायलों की संख्‍या स्‍पष्‍ट नहीं की। आईजी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।



– बसपा सुप्रीमो मयावती ने कहा कि मैं एससी / एसटी एक्ट के खिलाफ विरोध का समर्थन करती हूं।

– हरियाणा के यमुनानगर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया है। दरअसल काफी प्रदर्शनकारी एक साथ सड़क पर आ गए थे, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया।



– प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में गुरुग्राम एक्सप्रेस वे को ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी गुरुग्राम के सदर बाजार में भी रैली निकाल रहे हैं। >सुप्रीम कोर्ट में SC/ST एक्ट में बदलाव पर लिए गए फैसले का तत्काल रिव्यू करने से मना कर दिया है।

– भिंड के पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे ने कहा कि भिंड जिले में सेना को बुलाया गया, जहां प्रदर्शनकारियों द्वारा गोलीबारी में छह लोग घायल हो गए। सेना और अर्धसैनिक बलों को पंजाब में एहतियाती तौर पर स्टैंडबाय पर रहने के लिए कहा गया है।

– यूपी के आजमगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने यूपी रोडवेज की बस को आग के हवाले कर दिया। पहले बस में तोड़ फोड़ की गई। बस के सारे शीशे तोड़ दिए और फिर बस में आग लगा दी।

– भारत बंद से जुड़े प्रदर्शन हिंसक होते जा रहे हैं। मप्र के ग्वालियर में अब तक 19 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें दो की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। शाम छह बजे तक के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। (फोटोः एएनआई)

– मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एससी/एसटी प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान गोलियां चल गईं। बीच बाजार में एक शख्स पिस्तौल से गोली चलाता देखा गया, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल पनप गया।

– गुजरात के कच्छ स्थित गांधीधाम में भी आगजनी की गई। भारी संख्या में जुटकर दलित महिला ने भारत बंद का समर्थन किया। कच्छ में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ कर दी है। कच्छ में महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। वह सड़को पर ही बैठ गई हैं। इसके अलावा कच्छ के गांधीधाम में ही प्रदर्शनकारियों ने आग लगाकर भी विरोध प्रदर्शन किया है।

– होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि “हमने सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर की है। मैं सभी राजनीतिक दलों और समूहों से शांति बनाए रखने और हिंसा नहीं भड़काने के लिए अपील करता हूं।”

– गाजियाबाद में भी प्रदर्शन का असर देखने को मिल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। यूपी के हापुड़ में कार फूंकी। इसके अलावा उत्तराखंड के देहरादून में प्रदर्शनकारियों ने जाकर जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद कराईं। मध्य प्रदेश के ग्वालिय के चार थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लग गया है। वहीं मेरठ में भी प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस चौकी फूंक दी है। मध्य प्रदेश में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए।

– जयपुर में प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। जयपुर एक शोरूम में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोक कर दी। शोरूम का शीशा तोड़ दिया। इसके अळावा जयपुर में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर उसके सामने खडे़ होकर और ट्रेन के इंजन पर चढ़कर प्रदर्शन किया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मध्यप्रदेश के मुरैना में भी रेलवे ट्रेक को ब्लॉक कर दिया है।



– रांची में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क जाम कर रहे थे। पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी इसी को लेकर दोनों के बीच भिडंत हो गई।

– सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब राजस्थान में भी विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है। गाड़ियों समेत दूसरी प्रॉपर्टी फूंक दी हैं। इसके अलावा राजस्थान के ही भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं।

– मेरठ में हिंसक हुआ SC/ST एक्ट को लेकर विरोध प्रदर्शन। यूपी के मेरठ में भारत बंद को लेकर रोड पर तोड़फोड़। रोड पर जा रही होंडा सिटी और i20 कार के शीशे तोड़े। लोगों को चोट भी आई। दिल्ली के मंडी हाउस पर भी हो रहा भारत बंद को लेकर विरोध प्रदर्शन।

– यूपी के आगरा में प्रदर्शनकारियों ने लगाया जाम। इसके अलावा राजस्थान के भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं। वह लाठी डंडों के साथ सड़क पर बैठी हैं। पंजाब के अमृतसर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री थावर चंद्र गहलोत ने कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं तब तक एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों से कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता।

SC/ST एक्ट को लेकर बिहार के आरा में CPIML समेत कई संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी। इसके रेलवे फाटक पर टायर डालकर आगजनी भी की। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने बिहार के सोनापुर में रोड ब्लॉक कर दी। भारत बंद का भोजपुर में भी असर दिख रहा है। यहां सड़कों पर सन्नटा पसरा हुआ है। सभी दुकानें बंद हैं और परिचालन भी ठप हो गया ह‍

एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित संगठनों ने सोमवार को देशभर में प्रदर्शन किया, धीरे-धीरे यह हिंसक होता चला गया. भारत बंद के आह्वान पर देश के अलग-अलग शहरों में दलित संगठन और उनके समर्थकों ने ट्रेन रोकीं और सड़कों पर जाम लगाया. उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में तोड़फोड़, जाम और आगजनी की घटनाएं सामने आई, लेकिन जान-माल का काफी नुकसान भी हुआ.

देशभर में भड़की हिंसा में एक बच्चे समेत 11 लोगों की जान चली गई. मध्यप्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में दिनभर स्थिति बेहद खराब रही और लोगों ने जमकर हंगामा किया. विरोध प्रदर्शन के कारण एमपी में 7, उत्तर प्रदेश में 2 और राजस्थान में 1 व्यक्ति की मौत हो गई. बाडमेर में एक हिंसक झड़प में 25 लोग घायल हो गए.

दूसरी ओर, बिहार में भारत बंद के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में 3,619 लोगों को गिरफ्तार किया गया. गाजियाबाद में हंगामे को देखते हुए सभी स्कूलों में मंगलवार (3 अप्रैल) को छुट्टी कर दी गई है.



देश के कई शहरों में पुलिस थानों को भी निशाना बनाया गया है. साथ ही सरकारी वाहनों में आगजनी की गई. प्रदर्शनकारियों के बवाल के चलते कई रूट पर ट्रेनें चल नहीं पाईं. साथ ही कई हाईवे घंटों तक जाम रहे.

ध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार (2 अप्रैल) को भारत बंद के समर्थन में बोले। उन्होंने इसी के साथ सड़क पर उतरने वाले दलितों को सलाम किया। उन्होंने कहा, "दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डीएनए में है। जो इस सोच को चुनौती देता है, उसे वे हिंसा से दबाते हैं।" कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, "हजारों दलित भाई-बहन आज सड़क पर उतरकर नरेंद्र मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग उठा रहे हैं। हम उन सभी को सलाम करते हैं।" आपको बता दें कि दलित संगठनों ने आज (2 अप्रैल) भारत बंद बुलाया है। ऐसा एससी-एसटी एक्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसले को लेकर हुआ है। छह राज्यों में बड़े स्तर पर इसका असर देखने को मिला, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में हिंसक प्रदर्शन भी हुए। खबर लिखे जाने तक 5 की मौत और 30 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी है।

पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) मकरंद देऊस्कर ने बताया, ‘बंद प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में ग्वालियर में दो, भिण्ड में एक और मुरैना में एक व्यक्ति की मौत हो गई.’

उन्होंने बताया कि मरने वाले लोगों की पहचान राकेश जाटव, दीपक जाटव (ग्वालियर), महावीर राजावत (भिण्ड) और राहुल पाठक (मुरैना) के तौर पर हुई है
जय भीम  जय भारत 

Sunday, 1 April 2018

2 अप्रैल के भारत बंद को 22 संगठनों का समर्थन

जय भीम  जय भारत
एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के कुछ प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के विरोध में भीम आर्मी ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया है। प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक राज ने कहा कि एससी-एसटी सहित ओबीसी के 22 संगठनों ने बंद का समर्थन किया है। इसकी सफलता के लिए संत रविदास आश्रम में बैठक हुई। मांग की गई कि निष्प्रभावी किए गए प्रावधानों को फिर से लागू कराया जाए, ताकि एससी-एसटी को न्याय मिल सके। बैठक में अमरजीत कुमार राम, त्रिलोकी मांझी, सुरेंद्र महान, विनोद कुमार मरांडी, चंदन कुमार, मनोज कुमार, दिनेश कुमार आदि मौजूद थे।

SC-ST एक्ट में बदलाव के खिलाफ लोग उतरेंगे सड़कों पर, 2 अप्रैल को भारत बंद का किया एलान
 तमाम सामाजिक संगठन, दलित संगठन और दलित समाज से जुड़े लोगों ने दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है। इनका आरोप है कि SC-ST अत्याचार निरोधक अधिनियम को कमजोर किया गया है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में कुछ बड़े बदलाव किए।

कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता दो अप्रैल को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने वाले हैं। वरिष्ठ पत्रकारदिलीप मंडल ने अपनी फेसबुक डीपी बदलकर इस प्रदर्शन का समर्थन किया है।


छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एससी-एसटी एक्ट मामला समेत जिले की 16 सूत्री मांगों को लेकर आगामी 2 अप्रैल को कांग्रेस की विशाल रैली है. आपको बता दें कि कांग्रेस की रैली में कांग्रेस उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा समेत बस्तर के विधायक भी शामलि होंगे.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने के विरोध में कई सामाजिक संगठन सामाने आ गए हैं. संशोधन को समाप्त कर एक्ट को पहले की भांति रखने की मांग की जा रही है. अनुसूचित जाति और अनुसचित जनजाति के लोग इस एक्ट को शिथिल करने के विरोध में आगामी 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है.

वहीं मामले में उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा भी भारत बंद का समर्थन करते हुए क्षेत्र की 16 अन्य मांगों को लेकर जिला मुख्यालय में रैली और महासभा का आयोजन रखा है. इसमें बस्तर संभाग के विधायक समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. कवासी लखमा का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है.

उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा का कहना है कि आगामी 2 अप्रैल को सबसे पहले बस्तर संभाग के सुकमा जिले में कांग्रेस की विशाल रैली का आयोजन होगा. इसमें वे राज्यपाल के नाम से जिले के 16 सूत्री मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपेगे.

दो अप्रैल को बंद कराया जाएगा केयू

कुरुक्षेत्र। एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया है। इसी को लेकर शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय के डॉॅ. भीम राव अंबेडकर स्टडी सेंटर में अंबेडकरवादी छात्र संगठनों, डॉ. अंबेडकर अनुसूचित कर्मचारी संघ, डॉ. अंबेडकर अनुसूचित शिक्षक संघ की सामूहिक बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया की भारत बंद को ध्यान में रखते हुए विश्विद्यालय को बंद कराया जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाते हुए जवाहर लाल नेहरू लाइब्रेरी के सामने शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन करते हुए विश्विद्यालय बंद कराया जाएगा। इसके साथ ही डॉ. आंबेडकर चौक तक रोष मार्च निकाला जाएगा। इस मौके पर अंबेडकरवादी छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, कर्मचारी संघ, शिक्षक संघ के पदाधिकारी मौजूद थे।



 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के संबंध में उच्चत्तम न्यायालय के फैसले के विरोध में संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है। समिति के प्रधान कुलवंत सिंह भरोमाजरा ने आज अन्य संगठनों के नेताओं सहित एक संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि डा. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के उत्थान को ध्यान में रख कर भारत के संविधान का निर्माण किया था। 
उन्होंने कहा कि केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी साजिश के तहत संविधान की धाराओं के साथ छेड़छाड़ कर रही है जिसके कारण देश भर में डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर बनी दलित सभाओं में भारी रोष उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उच्चत्तम न्यायालय ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो दो अप्रैल को देश भर में बंद कर शांतिमय धरना- प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने सभी राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक तथा व्यापारिक संगठनों से भारत बंद को सफल बनाने की अपील की है।  इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष महिन्द्र सिंह, वरिष्ठ उपप्रधान संत देस राज गोविंदपुरा, महासचिव निर्मल सिंह, अखिल भारतीय आदि मिशन पंजाब के प्रधान मदन लाल रंधावा, अंबेडकर सेना और सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान चंदन ग्रेवाल उपस्थित थे। 
सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ सोमवार को घोषित भारत बंद का कई संगठनों ने समर्थन किया है. इसके तहत कई पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतरेंगे. संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पूर्व की तरह लागू किया जाए.
SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ खड़े हुए झारखंड के दर्जनों संगठन, 2 अप्रैल को भारत बंद, अलर्ट जारी
 एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों को शिथिल करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों और उससे जुड़े संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया है. बंद को झारखंड के दर्जनों सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल गया है. रविदास जयंती पर आयोजित होने वाले इस भारत बंद को लेकर खुफिया विभाग ने झारखंड सरकार को अलर्ट किया है.

आदिवासी छात्र संघ, रांची विश्वविद्यालय के अध्‍यक्ष संजय महली ने कहा है कि 2 अप्रैल का बंद ऐतिहासिक होगा. बंद को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार कर ली गयी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए छोटे-छोटे समूह बनाये गये हैं,  जो विभिन्‍न इलाकों में बंद को सफल बनाने के लिए सड़क पर उतरेंगे.
2  अप्रैल को भारत बंद में शामिल होगी नगर निगम सफाई मजदूर यूनियन
नगर निगम सफाई मजदूर यूनियन (रजि.) फगवाड़ा ने एस.सी./एस.टी. एक्ट के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए फैसले के रोष स्वरूप 2 अप्रैल को विभिन्न संगठनों द्वारा किए जा रहे भारत बंद में शामिल होने का ऐलान किया है।

यहां नगर निगम कमिश्नर को इस हड़ताल संबंधी लिखित पत्र देकर अवगत करवाने के उपरांत यूनियन के प्रधान रोशन लाल सेठी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय का एस.सी./एस.टी. एक्ट को लेकर दिया गया फैसला पीड़ादायक है। इसके खिलाफ सख्त कानून बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि उक्त हड़ताल में सफाई मजदूर यूनियन के अलावा म्यूनिसिपल सफाई कर्मचारी यूनियन इंटक भी शामिल होगी। 
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Saturday, 31 March 2018

SC/ST एक्ट: सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से नाखुश भाजपा के दलित सांसद, उठाई ये मांग

। बीजेपी के दलित सांसद सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कड़े प्रावधानों को कम करने के कारण नाराज हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के दलित सांसदों ने बुधवार को सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत से मुलाकात की है और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस मामले को उठाने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक, एक मंत्री सहित कई दलित सांसदों ने सरकार से न्यायालय में एक समीक्षा याचिका दायर करने को कहा


दलित समाज हुआ एकजुट

सांसद और भाजपा के एससी सेल के प्रमुख विनोद कुमार सोनकर ने कहा कि, यह संशोधन परेशान करने वाले लोगों को सजा से बचाएगा। भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी के दलित सांसद बहुत परेशान हैं। अब केवल एक चीज बचाी है एससी और एसटी के आरक्षण को खत्म करना। मुझे डर है कि फिलहाल चीजें उस दिशा में आगे बढ़ रही हैं




दलित समाज ने एससी/एसटी एक्ट में संसोधन को लेकर एकजुट हो गया है. इसी कड़ी में समाज के लोगों ने दादरी के रोज गार्डन में मीटिंग कर रोष प्रदर्शन किया. साथ ही निर्णय लिया कि दो अप्रैल को भारत बंद में दलित समाज बढ़चढक़र भाग लेगा. दलित समाज ने केंद्र सरकार को आगाह किया कि एक्ट में संसोधन वापिस नहीं लिया तो देशभर में एकजुटता दिखाते हुए आंदोलन शुरु किया जाएगा.

दलित समाज के अध्यक्ष जगदीश राय की अध्यक्षता में रोज गार्डन में बैठक आयोजित की गई. बैठक में दलित नेताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि एससी-एसटी कानून में संशोधन कर उनके समाज के साथ अन्याय किया हैय केंद्र सरकार द्वारा संशोधन को वापिस लेना चाहिए.

इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान संबोधित करते हुए दलित नेता जगदीश राय व जसवंत कलियाणा ने संयुक्त रूप से कहा कि दो अपै्रल को भारत बंद के साथ ही दादरी में विरोध रैली होगी. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किया है जिसका वो विरोध करते हैं.
जाने sc st act के बारे में

इसी फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को भारत बंद करने का आह्वान किया गया है. साथ ही इसके विरोध में दो अपै्रल को दादरी में सैकडों की सख्या में एससी और एसटी समाज के लोग एकत्रित होंगे और रोष प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचेंगे. प्रदर्शन के बाद डीसी को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा. दलित नेताओं ने अल्टीमेटम दिया कि अगर एक्ट में किए संसोधन को वापिस नहीं लिया तो देश भर का दलित समाज बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा.

Friday, 30 March 2018

SC-ST एक्ट के खिलाफ जारी फरमान पर एकजुट हुआ दलित समाज

जय भीम साथियों
उत्तर प्रदेश में बहराइच से बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने अब पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. उनका कहना है कि पार्टी में दलितों पिछड़ों के साथ इंसाफ नहीं हो रहा इसलिए वह एक अप्रैल को लखनऊ में रैली करेंगी. वह इस मुहिम में मायावती से भी जुड़ने को तैयार हैं. उधर, यूपी सरकार में सहयोगी दल के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी फिर सरकार के कामकाज़ से नाराज़गी जताई है. 

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सरकार में भी खलबली है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका दाख़िल करने की अर्ज़ी को लेकर एनडीए के सभी दलित सांसद पीएम नरेंद्र मोदी से संसद में मुलाकात करेंगे. कांग्रेस भी सरकार से इस फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका देने की मांग कर रही है. वहीं राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग आज राष्‍ट्रपति से मिलेगा और उसने पीएम मोदी से भी मिलने के लिए समय मांगा है. 

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति( अत्याचार निवारण) अधिनियमके संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर केन्द्र सरकार से तत्काल पुनरीक्षण याचिका दायर करने की मांग  की है.


सेवा में
          सर्व श्री, 

1-उदित राज
2-प्रो0 राम शंकर
3-साध्वी सावित्री बाई फूले
4-कमलेश पासवान
5-श्रीमति प्रियंका सिंह रावत
6-अशोक कुमार दोहरे
7-अंशुल वर्मा
8-राजेश कु0 दिवाकर
9-भानु प्रताप सिंह
10-विनोद कुमार सोनकर
11-श्रीमती नीलम सोनकर
12-श्रीमती अंजू बाला 
13-कौशल किशोर
14-डॉ0 यशवंत सिंह

समस्त एस०सी०/एस०टी० सांसद, भारत सरकार

विषय:-117वॉ संविधान संशोधन (प्रोन्नति में आरक्षण बिल) लोकसभा में पास कराओ या इस्तीफा दो

महोदय/महोदया
             आपको भली भांति अवगत है कि 117 वां संविधान संसोधन बिल राज्य सभा से पारित हो चुका है और लोक सभा में लम्बित है।जब कि यह बिल 1995 से लम्बित था आप जिस पार्टी से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उस सरकार ने अपनी दलितविरोधी मानसिकता का उदाहरण दे दिया है।
   आप यूपी से लोक सभा की उन सीटों से सांसद है जो भारत के संविधान में उल्लेखित प्रतिनिधत्व अधिकार पर संरक्षित है इसलिए आज आप सांसद है और संसद मे दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं किन्तु आप अपने दलित समाज के अधिकारो के लिए संसद मे आवाज क्यों नहीं उठाते हो।
         आप की सरकार पूर्ण बहुमत की सरकार है आप सभी दलित सांसद सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाते हो। ऐसी क्या मज़बूरी है की आप सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री को इस्तीफा क्यों नही सौंप देते है क्यों आप सक्रिय भूमिका नहीं अपनाते हो??
       आप भी बाबा साहेब को धोखा दे रहे हो। आप समाज के प्रति ज़िम्मेदार नहीं हो। आप ने आरक्षण के बल पर सांसदी तो ले ली लेकिन आप उन लाखों लोगों की ओर नहीं देख रहे हैं जो आप की निष्क्रियता के कारण तमाम कानूनी/ सरकारी बाध्यताओं को झेलने को मजबूर है कुछ तो शर्म करो।
       यदि आप सक्रिय भूमिका नहीं अदा कर सकते तो आप या तो बिल पास कराओ या समाज के लोगो के बीच मत जाओ। आप का समाज के लोग इस्तीफा मांग रहे हैं आप चुन सकते हैं 

सांसदी या समाज। 

वर्ना वो दिन दूर नही जब समाज के लोग बहिष्कार करंगे।
   अतः आप से आग्रह है कि 117वॉ संविधान संशोधन बिल पास कराओ या इस्तीफा दो। 


" इस मैसेज को इतना शेयर करें कि सभी दलित सांसदों तक पहुँच जाये।


फूलन देवी एक ऐसी साहसी महिला थी जिसके कारण ही sc st एट्रोसिटी कानून बना था..उसने 22 राजपूत लोगो की गर्दन काटकर अपने साथ हुए रेप का बदला लिया था.........
ईसी कारण ये कानून राजीव गांधी ने बनवाया था वो सरकार डर गई थी की कही ऐसा ना हो की sc/st के लोग मारने काटने पर उत्तर जाए.....
इतिहास गवाह हे जब जब अपने लोगो ने अपनी ताकत दिखाई है...इतिहास ही बदल दिया है....पर हमारे लोग सो रहे हे अभी...
जब एक महिला इतना साहस कर सकती है तो देश के 20 करोड़ sc और 10 करोड़ st क्या कर रहे है..



 एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गई है. जब से यह फैसला आया है, तब से कांग्रेस इस फैसले से नाराज चल रही है. मगर अब कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी की नेतृत्व में संसद परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और सरकार से एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की. इस दौरान नारे लगाए जा रहे थे- दलितों के सम्मान में, राहुल गांधी मैदान में. बताया जा रहा है कि इस कानून को कानून को हल्का बनाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी नाराज चल रही है, बल्कि बीजेपी के भी दलित नेता नाराज चल रहे हैं. 






एससी-एसटी एक्ट में फौरन गिरफ्तारी ना करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस ने इसको लेकर सीधा केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। शुक्रवार को संसद में विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने ठीक तरीके से कोर्ट में पक्ष नहीं रखा।

एससी-एसटी एक्ट पर रिव्यू पेटिशन की मांग
संसद परिसर में गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस नेताओं ने एससी-एसटी एक्ट पर सरकार से रिव्यू पेटिशन दाखिल करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने यह नारे लगाए- ‘दलितों के सम्मान में, राहुल गांधी मैदान में।’
जय भीम जय भारत 
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Thursday, 29 March 2018

मनुस्मृति के विचार

जय भीम  जय भारत
मनुस्मृति क  विचार
इससे पहले की हम मनुस्मृति क्यों जलाई गयी को जाने, मनुस्मृति का मकसद जान लेते हैं, मनुस्मृति संविधान इसलिए लिखा गया था की हारे हुए बौद्ध/राक्षश/असुर/दलित  फिर दोबारा संगठित होकर सर न उठा पाएं, उनका परमानेंट गुलाम बनाने का ग्रन्थ है मनुस्मृति, आईये मनुस्मृति पर ओशो जी के विचार से शुरू करते हैं
sc st act के बारे में जानें
 मै कहता हूं
 मनुस्मृति दहन भूमि। – ब्राहम्णवाद को दफनाओ। – छुआछूत को नष्ट करो । 

मनुस्मृति क्यों जलाई गई पढें
“ गरीब आदमी तो क्रांति की कल्पना भीनहीं कर सकते क्योंकि उसको तो किसी भीप्रकार कि शिक्षा की अनुमति ही नहीं दी गई.उसे अपने से उपर के तीन वर्णों से किसी भीसंपर्क से मना कर दिया गया वो शहर केबाहर रहता है वो शहर के अंदर नहीं रहसकता.गरीब लोगों के कुँए इतने गहरे नहीं हैं वे कुँए बनाने में ज्यादा पैसा नहीं डाल सकतेहैं. व्यवसायियों के पास अपने बड़े और गहरेकुँए है और राजा के पास अपने कुँए है ही। अगर कभी बारिश नहीं आए और उसके कुँएसूख रहे होते हैं, तो भी शूद्र को अन्य किसीके कुएं से पानी लेने की अनुमति नहीं है उसको किसी नदी से पानी लाने के लिए दसमील दूर जाना पड़ सकता है. वो इतना भूखाहै की दिन मे एक बार के भोजन का प्रबंधनकरना भी मुश्किल है |उसको कोई पोषणनहीं मिलता,वे कैसे क्रांति के बारे में सोचसकते हैं? वह यह जानता है कि कि यहीउसकी किस्मत है: पुजारी ने उनको यहीबताया है यही उनकी मानसिकता में जड़ करगया है|“इश्वर ने आप को अपने पर भरोसादिखाने का मौका दे दिया है. यह गरीबी  कुछभी नहीं है, यह कुछ वर्षों के लिए ही है,आपवफादार रह सकते हैं तो आपको महान फ़लमिलेगा”| तो एक तरफ़ तो पुजारी किसी भीपरिवर्तन के खिलाफ उन्हें ये उपदेश देताजाता है है, और दूसरी तरफ वे परिवर्तन करभी नहीं सकते क्योकि वे कुपोषण काशिकार हैं. और आप के लिये एक बातसमझने की है कि कुपोषित व्यक्ति बुद्धि बलखो देता है. बुद्धि बल वहीँ खिलता है जहाँ वोसब कुछ होता है है जिसकी शरीर कोजरूरत है,इतना ही नहीं इसके साथ साथ‘कुछ और’ भी चाहिए. ये जो ‘कुछ और’और है यही तो बुद्धि हो जाता है,बुद्धि एकलक्जरी है. एक दिन में केवल एक बारभोजन करने वाला व्यक्ति के पास कुछ भीनहीं है, बुद्धि विकसित करने के लिए उस्केपास कोई ऊर्जा नहीं है. यह बुद्धिजीवी वर्ग हैजो विचारों, नए दर्शन, जीवन के नए तरीके,भविष्य के लिए नए सपने बनाता है| लेकिनयहाँ बुद्धिजीवि तो शीर्ष पर पहले से ही है.वास्तव में भारत मे जबरदस्त महत्व का कामकिया गया है विश्व का कोई अन्य देश इतनासक्षम नहीं है कि  इस तरह के किसीवैज्ञानिक तरीके से यथास्थिति बनाए रखें.और आप हैरान होंगे ये एक आदमी ने किया,वो मनु था. हजारों साल बाद उसके सूत्रअभी भी  वास्तव में वैसे के वैसे पालन कियेजा रहे हैं|” … ओशो रजनीश. Book Title: The Last Testament, Vol. 2.       //  Chapter 6: The Intelligent Way
मनुस्मृति का इतिहास
कहने वाले कहते हैं कि आज मनुस्मृति को कौन जानता और मानता है, इसलिए अब मनु स्मृति पर हाथ धो कर पड़ने से क्या फायदा- यह एक मरे हुए सांप को मारना है. हमारा कहना है कि कई सांप इतने जहरीले होते हैं कि उन्हें सिर्फ मारना ही पर्याप्त नहीं समझा जाता बल्कि उसके मृत शरीर से निकला जहर किसी को हानि न पहुंचा दे इसलिए उसे जलाना भी पड़ता है.
वैसे मनु स्मृति जैसी घटिया किताब कि तुलना बेचारे सांप से करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा. बेचारे सांप तों यूँ ही बदनाम हैं, और अधिकाँश तों यूँ ही मार दिए जाते हैं. फिर भी सांप के काटने से एकाध आदमी ही मरता हैं जबकि मनु स्मृति जैसे ग्रन्थ तों दीर्घकाल तक पूरे समाज को डस लेते हैं. क्या ऐसे कृतियों की अंत्येष्टि यथासंभव किया जाना अनिवार्य नहीं हैं?

Monday, 26 March 2018

SC/ST ACT के बारे में


SC/ST एट्रोसिटी एक्ट कानून (गांव में लोग हरिजन एक्ट के नाम से जानते हैं ) उसको प्रभावहीन और कमजोर करने की साजिश पर सुप्रीम कोर्ट के वकील एडवोकेट आर0 आर0 बाग़ जी की लेखनी से ये कानूनी विश्लेषण प्रस्तुत हैबहुजनों जानो कैसे आपके पैरों तले जमीन खिसक रही है, ऐसे कानून बन रहे हैं की अब न आपका आरक्षण बचा ,न ही अब आपको बचाने वाला कोई कानून बचा है , सब तरफ प्राइवेटजेशन मतलब ब्राह्मणवादियों को मलिक बनाया जा रहा है आपको आपकी गुलामी की शुरुआत मुबारक हो।टाइम्स ऑफ़ इंडिया की 21-mar-2018 की फ्रंट पेज की खबर है की SC/ST एक्ट में माननीय न्यायलय ने जिस प्रकार से परिवर्तन किये है उससे अब SC/ST पर जुल्म करने वालों की गिरफ़्तारी नहीं होगी मतलब उनका हौसला और बढ़ जाएगा , पर आपको क्या आप तब तक इन बातों को नहीं समझोगे की जब तक खुद नहीं पीटेंगे/मरेंगे ,आप तो मन्दिरबाजी पूजा पाठ मौज मस्ती जारी रखो ।

SC/ST एक्ट में माननीय न्यायलय ने जिस प्रकार से परिवर्तन किये है उससे अब SC/ST पर जुल्म करने वालों की गिरफ़्तारी नहीं होगी मतलब उनका हौसला और बढ़ जाएगा|सुप्रीम कोर्ट कि  इस आदेश के बाद पिछड़ों के साथ दलित और आदिवासी को जातीय संघर्ष कराने में देशद्रोही दंगेबाज जातीवादियों को  बहुत मदद मिलेगी..
मेरा मानना है कि यह बहुत बड़ी साजिश चल रही है देश में l जो काम राजनीतिक पार्टी नहीं कर सकती वह मीडिया और जुडिशरी के माध्यम से न्यायपालिका के माध्यम से कराई जा रही है l सुप्रीम कोर्ट का आज एससी एसटी एक्ट के ऊपर जो जजमेंट आई है उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि भविष्य में आदिवासी और दलितों के ऊपर  कत्लेआम बढ़ेगी और जो दलित और आदिवासी ऑफिसर होंगे उनके ऊपर डिसिप्लिनरी एक्शन बढ़ेगा क्योंकि कोई रोक-टोक नहीं है !!
हालांकि अदालत का इरादा स्पष्ट रूप से अधिकारियों को “मनमानी गिरफ्तारी” से बचाने के लिए और “निर्दोष नागरिकों” को मामलों में झूठा फंसाया जाने से बचाने के लिए स्पष्ट रूप से था, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और गृह मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि अगर सजा इस अधिनियम के तहत दरें कम हैं, इस तरह के प्रावधान के दुरुपयोग के साथ ऐसा किया जा सकता है कि जिस तरह से जांच की जाती है और अदालतों में मुकदमे चलने वाले मामलों के साथ।

‘बिना किसी गिरफ्तारी की अनुमति’
अपने आदेश में, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सरकारी कर्मचारियों को उनके नियुक्ति प्राधिकारी की लिखित अनुमति के साथ ही गिरफ्तार किया जा सकता है। निजी कर्मचारियों के मामले में, उसने कहा था, संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को इसे अनुमति देना होगा।
यह देखा गया था कि सार्वजनिक प्रशासन अधिनियम के दुरुपयोग से सावधान थे और अधिकारियों को कर्मचारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां देना मुश्किल हो पाया था कि इस अधिनियम के तहत आरोप उनके खिलाफ लाए जा सकते हैं।
जैसे, सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना कि प्राथमिकी दर्ज करने से पहले एक प्रारंभिक जांच भी की जानी चाहिए कि मामला अत्याचार अधिनियम के मापदंडों के भीतर आता है या नहीं, यह मामूली या प्रेरित था या नहीं। अदालत ने यह भी माना था कि अगर अग्रिम जमानत की अनुमति दी जानी चाहिए तो आरोपी यह साबित करने में सक्षम है कि शिकायत दुर्भावनापूर्ण थी।
जातिवाद पर टिप्पणी
अदालत ने इस अवसर पर जोर देने का अवसर भी इस्तेमाल किया था कि यह कैसे महसूस करता है कि यह कानून “जातिवाद को सशक्त बनाएगा” और “जातिवाद पर निर्दोष नागरिकों के झूठे निषेध” को रोकने की आवश्यकता कैसे हो सकती है।
हालांकि, जो लोग अधिनियम के तहत कठोर मानदंडों की मांग कर रहे हैं, उनका कहना है कि इसके तहत कम अभिरक्षा दर वास्तव में इस बात पर प्रतिबिंब है कि मामले कैसे पंजीकृत हैं और पीछा करते हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट “हिडन अपैथीड: कास्ट डिस्रिमिनेशन विद इंडिया के ‘अस्पृश्यता’ नामक एक रिपोर्ट ने नोट किया था कि” दलित अक्सर न्याय के प्रशासन में भेदभावपूर्ण उपचार के शिकार होते हैं। अभियोजक और न्यायाधीश सख्ती से विफल रहते हैं और दलितों द्वारा लाए गए शिकायतों का विश्वासपूर्वक पालन करते हैं, जो इस तरह के मामलों में उच्चतम दर से निष्कासित होता है “।
यह ध्यान देने के साथ कि पुलिस आम तौर पर “दलितों के खिलाफ अपराधों को पंजीकृत या ठीक से पंजीकृत करने में असफल” थे, उन्होंने नोट किया था कि “न्याय के प्रशासन के अंगों से पहले दलितों के समान इलाज करने का अधिकार शुरू में समझौता हुआ है”।
इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली ने एक और अध्ययन में कहा था कि अधिनियम के तहत दायर 50% मामले अदालत में नहीं जाते हैं और पुलिस द्वारा बंद कर दिया जाता है। यह भी कहा गया था कि “जांच अधिकारियों के बीच जाति के पूर्वाग्रह” होने के चलते
नए संशोधनों में सख्त प्रावधानों की आवश्यकता दिखाई गई
वास्तव में, गृह मंत्रालय ने 2017 में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह नोट किया था कि “पीओए अधिनियम में किए गए निवारक प्रावधानों के बावजूद, अनुसूचित जातियों और एसटी के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार बढ़ाना सरकार के लिए चिंता का कारण था”। गृह मंत्रालय ने कहा था, “इसलिए, इस अधिनियम को मजबूत करने और अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उचित माना गया था।”
इसके बाद, यह उल्लेख किया गया था कि पीओए कानून के मौजूदा वर्गों के पुन: वाक्यांश के लिए और संस्थागत सुदृढ़ीकरण, अपील (एक नया खंड) से संबंधित अनुमानों का विस्तार करने के लिए, पीड़ितों और गवाह (एक नया अध्याय) और मजबूत बनाने के अधिकारों की स्थापना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2015 को लोकसभा ने 4 अगस्त 2015 को और राज्यसभा द्वारा 21 दिसंबर, 2015 को पारित कर दिया था। यह अधिनियम 26 जनवरी, 2016।
अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें आम तौर पर “अन्य आईपीसी अपराधों” के अधीन आती हैं
एससी / एसटी (पीओए) अधिनियम के खिलाफ एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2017 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014 में मामलों की संख्या 40,401 थी, लेकिन वे 2015 में मामूली रूप से 4.3% की गिरावट के साथ 38,670 पर बंद हुए, लेकिन बढ़ी 2016 में 40.801 तक पहुंचने के लिए 5.5% की वृद्धि हुई थी। इसमें “अन्य आईपीसी अपराधों” के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों में अधिकतर शिकायतों को शामिल किया गया था, जो दुरुपयोग और आपराधिक धमकी से संबंधित वर्गों को शामिल किया था।
2016 में, उत्तर प्रदेश (10,426 मामले) में अनुसूचित जातियों (एससी) के खिलाफ अत्याचार के मामले दर्ज किए गए, जिनमें कुल 25.6% के लिए बिहार था, बिहार के बाद 14.0% (5,701 मामले) और राजस्थान में 12.6% (5,134 मामले) थे 2016।
संयोग से, अपराध सिर-वार तिथि से पता चला है कि इन मामलों का सबसे बड़ा अनुपात महिलाओं के लिए 7.7% (3172 मामले) में बलात्कार के साथ-साथ 6.2% (2,541 मामलों) पर बलात्कार के आक्रोश के साथ महिलाओं पर हमला था।
अनुसूचित जनजातियों के मामले में, 2014 में 6,827 मामलों की संख्या दर्ज की गई, 2015 में 6,276 तक पहुंचने के लिए 8.1% की गिरावट आई, और फिर 2016 में 4.7% बढ़कर 6,568 हो गई। एसटी के मामले में, मध्य प्रदेश (1823 मामले) 27.8% पर अत्याचारों के मामले में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई, इसके बाद राजस्थान में 18.2% (11 9 मामले) और ओडिशा में 10.4% (681 मामले) दर्ज किए गए।
एसटीएस के मामले में, 9 74 बलात्कार के मामले सामने आए जिनमें से 14.8% उनके खिलाफ अपराध थे, इसके बाद 12.7% (835 मामले) और 2.5% (163 मामले) के अपहरण और अपहरण के मामले में महिलाओं पर हमला करने के इरादे से महिलाओं पर हमला किया गया था। ।
आरोपपत्र दर 77%, सजा दर 15.4%
पुलिस और अदालतों के मामलों के निपटान से पता चला है कि 1 9 8 9 के तहत, 2016 में जांच के लिए 11,060 मामले सामने आए और आरोप पत्र की दर 77% थी।
आंकड़ों के मुताबिक यह भी कहा गया है कि 2016 में, एससी / एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1 99 8 के तहत पिछले वर्ष से 45233 मामले लंबित थे, जबकि 5124 मामले में परीक्षण के लिए भेजा गया था जिसके परिणामस्वरूप कुल 50,357 वर्ष के दौरान मामलों हालांकि सरकार द्वारा कोई भी मामलों को वापस नहीं लिया गया था और कोई भी मामला याचिका सौदेबाजी द्वारा नहीं सुलझाया गया था, 49 मामले जटिल थे।
वर्ष 4546 के मामलों में, परीक्षण पूरा हो गया था। जबकि 701 मामलों में दोषी पाए गए, 3845 में आरोपी को निर्दोष या छुट्टी दे दी गई। इसलिए सजा की दर 15.4% थी, जबकि लंबित प्रतिशत 90.5% पर था।
पुलिस को कई मामलों में ‘गलत’, ‘गलती की तथ्य’
वर्ष के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट में पता चला कि पुलिस को 2150 मामलों को “सच है लेकिन (के साथ) अपर्याप्त साक्ष्य”, 5,347 मामले “झूठे” होने और 869 मामले “तथ्य की गलती” होने के लिए मिलते हैं।
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या 20.13 करोड़ थी। इसमें कहा गया है कि अत्याचारों में गैर अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति द्वारा अनुसूचित जाति के खिलाफ किए गए अपराधों का उल्लेख है और यह कि केवल भारतीय दंड संहिता (एससी / एसटी अधिनियम के बिना) के आंकड़ों के दायरे से बाहर रखा गया है, क्योंकि वे एससी / एसटी ।
हालांकि, अतीत में कुछ अध्ययनों ने पुलिस को मामलों पर ठीक से दर्ज करने या जांच करने के आरोपों का आरोप लगाया है, एनसीआरबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में पिछले साल की जांच लंबित मामलों 15498 पर थी, वर्ष के दौरान दर्ज मामलों 40801 थे और इसलिए जांच के लिए कुल मामलों 56,29 9 थे इसमें से कहा गया है कि सरकार द्वारा वापस ले जाने वाले 16 मामले, 40 अन्य पुलिस स्टेशनों या मजिस्ट्रेट को हस्तांतरित किए गए थे और छह को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 157 (1) (बी) के तहत जांच नहीं हुई थी।
जय भीम जय भारत