Friday, 13 April 2018

बाबासाहेब की जीवनी और उनके विचार

भारत के संविधान निर्माता, चिंतक, समाज सुधारक बाबा साहेब अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के मऊ में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था. उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था. वे अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान थे.

जानिए बाबा साहेब अंबेडकर की खास 10बातें
1. बाबा साहेब अंबेडकर का परिवार महार जाति से संबंध रखता था, जिसे अछूत माना जाता था. बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव देखने वाले अंबेडकर ने विषम परिस्थितियों में पढ़ाई शुरू की.

2. बाल विवाह प्रचलित होने के कारण 1906 में उनकी शादी नौ साल की लड़की रमाबाई से हुई.

3. 1908 में उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया. इस कॉलेज में प्रवेश लेने वाले वे पहले दलित जाति के बच्चे थे.

4. 1913 में एमए करने के लिए वे अमेरिका चले गए. अमेरिका में पढ़ाई करना बड़ौदा के गायकवाड़ शासक सहयाजी राव तृतीय से मासिक वजीफा मिलने के कारण संभव हो सका था.

5. 1921 में लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से उन्हें एमए की डिग्री मिली.

6. 1925 में बाबा साहेब को बॉम्बे प्रेसिडेंसी समिति ने साइमन आयोग में काम करने के लिए नियुक्त किया. इस आयोग का विरोध पूरे भारत में किया गया था.

7. अंबेडकर दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए 'बहिष्कृत भारत', 'मूक नायक', 'जनता' नाम के पाक्षिक और साप्ताहिक पत्र निकालने शुरू किये.

8. भारत की आजादी के बाद उन्हें कानून मंत्री बनाया गया. 29 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान रचना के लिए संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया.

मनुस्मृति का इतिहास

9. 1951 में संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने के बाद अंबेडकर ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया. इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी.

10. 14 अक्टूबर 1956 को अंबेडकर और उनके समर्थकों ने पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया. अंबेडकर का मानना था कि हिंदू धर्म के अंदर दलितों को कभी भी उनका अधिकार नहीं मिल सकता है. 6 दिसंबर, 1956 को अंबेडकर की मृत्यु हो गई.
भारत के लोगों के लिये डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस और उनके योगदान को याद करने के लिये 14 अप्रैल को एक उत्सव से कहीं ज्यादा उत्साह के साथ लोगों के द्वारा अंबेडकर जयंती को मनाया जाता है। उनके स्मरणों को श्रद्धांजलि देने के लिये वर्ष 2018 में ये उनका 127 वाँ जन्मदिवस उत्सव होगा। ये भारत के लोगों के लिये एक बड़ा क्षण था जब वर्ष 1891 में उनका जन्म हुआ था।

इस दिन को पूरे भारत वर्ष में सार्वजनिक अवकाश के रुप में घोषित किया गया। नयी दिल्ली, संसद में उनकी मूर्ति पर हर वर्ष भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री (दूसरे राजनैतिक पार्टियों के नेताओं सहित) द्वारा सदा की तरह एक सम्माननीय श्रद्धांजलि दिया गया। अपने घर में उनकी मूर्ति रखने के द्वारा भारतीय लोग एक भगवान की तरह उनकी पूजा करते हैं। इस दिन उनकी मूर्ति को सामने रख लोग परेड करते हैं, वो लोग ढोल बजाकर नृत्य का भी आनन्द लेते हैं।

अंबेडकर के द्वारा कहा गया कथन

“प्रगति की मात्रा के द्वारा ही एक समुदाय की प्रगति को मैं मापता हूँ जिसे महिलाओं ने प्राप्त किया है”।“ज्ञान एक पुरुष के जीवन की जड़ है”।“सामाजिक नीतिशास्त्र पर आधारित सामाजिक आदर्शों के द्वारा लोग और उनके धर्म को आँकना चाहिये। किसी भी दूसरे आदर्श का कोई मतलब नहीं होगा अगर लोगों के भले के लिये जरुरी अच्छाई धर्म आयोजित होता है”।“हर पुरुष जो चक्की के सिद्धांत को दोहराता है जैसे एक देश किसी दूसरे देश पर राज्य करने के लिये उपयुक्त नहीं होता को मानना चाहिये कि किसी दूसरे वर्ग पर राज्य करने के लिये एक वर्ग उपयुक्त नहीं होता”।“लंबे होने के बजाय जीवन अच्छा होना चाहियें”।“दिमाग की खेती मानव अस्तित्व का सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य होनी चाहिये”।“मानव नश्वर होता है। वैसे ही विचार होते हैं। एक विचार को फैलाव की जरुरत होती है जिस तरह एक पौधे को पानी की जरुरत होती है। नहीं तो दोनों मुरझा और मर जायेंगे”।“कोई एक जिसका दिमाग मुक्त नहीं यद्यपि जीवित है, मरने से बेहतर नहीं है”।“बुद्ध की सीख शाश्वत है, लेकिन उसके बाद भी बुद्ध उसको अचूक घोषित नहीं करते हैं”।“जैसे पानी की एक बूँद महासागर में मिलते ही अपनी पहचान खो देती है, व्यक्ति समाज में अपने होने का अस्तित्व नहीं खोता है जिसमें वो रहता है। व्यक्ति का जीवन स्वतंत्र होता है। वो अकेले समाज का विकास करने के लिये पैदा नहीं हुआ है, बल्कि अपने विकास के लिये हुआ है”।“किसी एक के अस्तित्व का प्रमाण है दिमाग की स्वतंत्रता”।“दिमाग की वास्तविकता वास्तविक स्वतंत्रता है”।“मैं धर्म को पसंद करता हूँ जो आजादी, समता और भाईचारा सिखाता है”।“इंसानों के लिये धर्म है ना कि धर्म के लिये इंसान”।“धर्म मुख्यत: केवल एक सिद्धांत की विषयवस्तु है। ये नियम का मामला नहीं है। जिस पल ये नियमों से बिगड़ता है, एक धर्म होने के नाते ये समाप्त होता है, क्योंकि ये जिम्मेदारियों को मारता है जो सच्चे धार्मिक कानून का एक सार है”।“व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के लिये एक वातावरण बनाना धर्म का बुनियादी विचार है”।“अगर आप ध्यान से पढ़ेंगे, आप देखेंगे कि बौद्ध धर्म कारणों पर आधारित है। इसमें जन्मजात लचीलेपन का तत्व है, जो किसी दूसरे धर्म में नहीं पाया जाता है”।“एक प्रसिद्ध व्यक्ति से अलग होता है एक महान आदमी जो समाज का नौकर बनने के लिये तैयार होता है”।“हिन्दू धर्म में, विकास के लिये जमीर, कारण और स्वतंत्र विचार के पास को कोई अवसर नहीं है”।“पति और पत्नि के बीच का रिश्ता एक सबसे घनिष्ठ मित्र की तरह होनी चाहिये”।“इसांन के लिये किसी एक के पास कोई सम्मान या आदर नहीं हो सकता जो समाज सुधारक की जगह ले और उसके बाद उस पदवी के तार्किक परिणाम को देखने से मना कर दे, उसे अकेले ही खराब काम का अनुसरण करने दें”।“एक कठोर वस्तु मिठाई नहीं बना सकता। किसी का भी स्वाद बदल सकता है। लेकिन जहर अमृत में नहीं बदल सकता”।“एक सफल क्रांति के लिये इतना ही काफी नहीं है कि वहाँ असंतोष हो। जो चाहिये वो गंभीर है और न्याय की आस्था के द्वारा, राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की जरुरत और महत्व”।“माना कि लंबे समय तक आपने सामाजिक आजादी प्राप्त नहीं की, जो भी स्वतंत्रता आपको कानून के द्वारा आपको उपलब्ध करायी जा रही है उसका आपके लिये कोई लाभ नहीं है”।
मनुस्मृति क्यों जलाई गई पढें

14 अक्टूबर 1956 को आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. वे देवताओं के संजाल को तोड़कर एक ऐसे मुक्त मनुष्य की कल्पना कर रहे थे जो धार्मिक तो हो लेकिन ग़ैर-बराबरी को जीवन मूल्य न माने.


यदि नई दुनिया पुरानी दुनिया से भिन्न है तो नई दुनिया को पुरानी दुनिया से अधिक धर्म की जरूरत है.’  डॉक्टर आंबेडकर ने यह बात 1950 में ‘बुद्ध और उनके धर्म का भविष्य’ नामक एक लेख में कही थी. वे कई बरस पहले से ही मन बना चुके थे कि वे उस धर्म में अपना प्राण नहीं त्यागेंगे जिस धर्म में उन्होंने अपनी पहली सांस ली है.

14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया. आज उनके इस निर्णय को याद करने का दिन है. यह उनका कोई आवेगपूर्ण निर्णय नहीं था, बल्कि इसके लिए उन्होंने पर्याप्त तैयारी की थी.

उन्होंने भारत की सभ्यतागत समीक्षा की. उसके सामाजिक-आर्थिक ढांचे की बनावट को विश्लेषित किया था और सबसे बढ़कर हिंदू धर्म को देखने का विवेक विकसित किया.

गेल ओमवेट ने आंबेडकर की एक जीवनी लिखी है. उसका नाम है – डॉक्टर आंबेडकर: प्रबुद्ध भारत की ओर. यह प्रबुद्धता आंबेडकर के सामाजिक-आर्थिक चिंतन में तो दिखती ही है, वे धर्म के बिना मनुष्य की कल्पना भी नही करते हैं.

मुंबई के मिल मजदूरों, झुग्गी बस्तियों, गरीब महिलाओं के बीच भाषण देते हुए आंबेडकर समझ रहे थे कि भारतीय मन धर्म के बिना रह नही सकता लेकिन क्या यह वही धर्म होगा जिसने उस जीवन का अनुमोदन किया था जिसके कारण दलितों को सदियों से संतप्त रहना पड़ा है. वे इस धर्म को त्याग देना चाहते थे.

Monday, 9 April 2018

भगवान् बुद्ध का जीवन और उनके विचार

माना जाता है कि भगवान गौतम बुद्ध की ज्ञान की खोज उस समय शुरू हुई जब उन्होंने एक ही दिन में तीन दृश्य देखे. पहला- एक रोगी व्यक्ति, दूसरा- एक वृद्ध और तीसरा- एक शव. जीवन का यह रूप देखकर हर तरह की सुख सुविधा से संपन्न जीवन को छोड़कर राजकुमार सिद्धार्थ गौतम जंगल की ओर निकल पड़े थे ज्ञान और बोध की खोज में…


सुख और सुविधाओं से इसी विरक्ति ने उन्हें राजकुमार गौतम से भगवान बुद्ध बनने की राह पर अग्रसर किया. उन्होंने जीवन में ज्ञान प्राप्त किया और इसे सभी मनुष्यों में बांटा भी. पेश हैं भगवान बुद्ध के वह 12 वचन जो अपनाने से आपको जीवन में सफलता और शांति मिलेगी...
 किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से ज्यादा डरना चाहिए, जानवर तो बस आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुकसान पहुंचा सकता है.स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा सम्बन्ध है.घृणा, घृणा करने से कम नहीं होती, बल्कि प्रेम से घटती है, यही शाश्वत नियम है.    तुम अपने क्रोध के लिए दंड नहीं पाओगे, तुम अपने क्रोध द्वारा दंड पाओगे.हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो शांति लाये.सभी गलत कार्य मन से ही उपजाते हैं. अगर मन परिवर्तित हो जाय तो क्या गलत कार्य रह सकता है.अतीत पर ध्यान केन्द्रित मत करो, भविष्य का सपना भी मत देखो, वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करो.वह व्यक्ति जो 50 लोगों को प्यार करता है, 50 दुखों से घिरा होता है, जो किसी से भी प्यार नहीं करता है उसे कोई संकट नहीं है.क्रोधित रहना, किसी और पर फेंकने के इरादे से एक गर्म कोयला अपने हाथ में रखने की तरह है, जो तुम्हीं को जलती है.अपने शरीर को स्वस्थ रखना भी एक कर्तव्य है, अन्यथा आप अपनी मन और सोच को अच्छा और साफ़ नहीं रख पाएंगे.

गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले जब कपिलवस्तु की महारानी महामाया देवी अपने नैहर देवदह जा रही थीं, तो रास्ते में लुम्बिनी वन में हुआ। 



> यह स्थान नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान है, वहां आता है। जहां एक लुम्बिनी नाम का वन था। > उनका नाम सिद्धार्थ रखा गया। उनके पिता का नाम शुद्धोदन था। जन्म के सात दिन बाद ही मां का देहांत हो गया। सिद्धार्थ की मौसी गौतमी ने उनका लालन-पालन किया।

सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र के पास वेद और उपनिषद्‌ तो पढ़े ही, राजकाज और युद्ध-विद्या की भी शिक्षा ली। कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान, रथ हांकने में कोई उसकी बराबरी नहीं कर पाता।


भगवान बुद्ध ने आठ सालों तक एक भिक्षुक का जीवन जिया, जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने महल से भाग कर की थी। लेकिन बुद्धत्व मिलने के बाद एक दिन वे अपने महल पहुंचे…



शायद ही दुनिया में ऐसा कोई इंसान होगा जिसने गौतम का नाम न सुना हो। ज्यादातर लोग उन्हें बुद्ध के नाम से जानते हैं। इस धरती पर कई बार आध्यात्म की एक बड़ी लहर सी आई है। बुद्ध खुद ऐसी ही एक आध्यात्मिक लहर रहे हैं। संभवत: वह धरती के सबसे कामयाब आध्यात्मिक गुरु थे – उनके जीवन काल में ही उनके साथ चालीस हजार बौद्ध भिक्षु थे और भिक्षुओं की यह सेना जगह-जगह जाकर आध्यात्मिक लहर पैदा करती थी।

यशोधरा ने बच्चे को उनके सामने रखा, बच्चा लगभग आठ साल का था। उन्होंने बच्चे को बुद्ध के सामने रखते हुए कहा, ‘इसके लिए आपकी क्या विरासत है? आप और आपकी आध्यात्मिक बकवास! आप इसे क्या देकर जाएंगे?

उन दिनों उन इलाकों में आध्यात्मिक प्रक्रिया सिर्फ संस्कृत में ही सिखाई जाती थी, और संस्कृत भाषा की सुविधा एक खास वर्ग को ही उपलब्ध थी। दूसरों के लिए यह भाषा सीखना वर्जित था, क्योंकि इस भाषा को ईश्वर के पास पहुंचने का जरिया माना जाता था। हर किसी की पहुंच वहां तक नहीं थी। बुद्ध ने पालि भाषा में अपनी शिक्षा रखी जो उस समय की बोलचाल की भाषा थी। इस तरह उन्होंने हर तरह के लोगों के लिए आध्यात्मिकता के दरवाजे खोल दिया। और फि र आध्यात्मिकता ने एक विशाल लहर का रूप ले लिया।

एक रात वह अपनी पत्नी- अपनी युवा पत्नी और नवजात शिशु को छोडक़र आधी रात को घर से निकल पड़े। वो एक राजा की तरह नहीं निकले, बल्कि एक चोर की तरह निकले थे- रात में घर छोडक़र गए थे। यह कोई आसान फैसला नहीं था। वह एक ऐसी पत्नी से दूर नहीं जा रहे थे, जिसे झेलना उनके लिए मुश्किल हो रहा हो। वह ऐसी स्त्री से दूर जा रहे थे, जिससे वह बहुत प्यार करते थे। वह नवजात बेटे से दूर जा रहे थे, जो उन्हें बहुत प्यारा था। वह अपनी शादी की कड़वाहट की वजह से नहीं भाग रहे थे। वह हर उस चीज से भाग रहे थे, जो उन्हें प्रिय थी। वह महल के ऐशो-आराम से, एक राज्य के राजकुमार होने से, भविष्य में राजा बनने की संभावना से, वह उन सभी चीजों से भाग रहे थे, जिन्हें हर आदमी आम तौर पर पाना चाहता है। लेकिन वे अपनी जिम्मेदारियों से भागने वाले कोई कायर नहीं थे। यह एक इंसान के साहस और ज्ञान की तड़प का परिणाम था। उन्होंने अपना महल, अपनी पत्नी, अपना बच्चा, अपना सब कुछ त्याग दिया और ऐसी चीज की खोज में लग गए, जो अज्ञात थी।

गौतम एक राजा थे, मगर उन्होंने एक भिक्षुक का जीवन जिया। आज आप इस घटना का गुणगान कर सकते हैं क्योंकि वह मशहूर हो चुके हैं। मगर मैं चाहता हूं कि आप समझें कि जब वह एक भिक्षुक की तरह चल पड़े थे, तो सडक़ पर चलते आम लोगों ने बाकी भिक्षुकों की तरह ही उन्हें भी दुत्कारा था। उन्हें उन सभी चीजों से गुजरना पड़ा जो किसी भिक्षुक को अपने जीवन में झेलना पड़ता है। जबकि वह एक राजकुमार थे और उन्होंने जानबूझकर भिक्षुक बनने का फैसला किया था।

आठ सालों की खोज के बाद, जब उन्हें पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ तो उन्हें अपना एक छोटा सा दायित्व याद आया जो उन्हें पूरा करना था। जब उन्होंने महल छोड़ा था, तो उनका पुत्र एक शिशु ही था। उनकी पत्नी एक युवती थी। वह रात को चोरों की तरह, बिना किसी को बताए वहां से चले आए थे। उनके पास उस हालात का सामना करने का साहस नहीं था या वह जानते थे कि इस पूरे हालात का सामना करने की कोशिश बेकार है, उसका वैसे भी कोई हल नहीं था। इसलिए वह रात के अंधेरे में चुपचाप घर छोडक़र चले गए। आठ साल बाद जब उन्हें पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो गया, वह बुद्ध हो गए… जब पुराने गौतम का कोई अस्तित्व नहीं बचा था, तो वह वापस आए, क्योंकि वह अपने इस छोटे से दायित्व को पूरा करना चाहते थे। वह अपनी पत्नी यशोधरा से मिलने आए, जो बहुत स्वाभिमानी स्त्री थीं।




यशोधरा को जैसे ही पता चला कि वह आने वाले हैं, वह गुस्से से पागल हो गईं। वह उन्हें किसी तरह बख्शना नहीं चाहती थीं। वह गुस्से से उबल पड़ीं और बोलीं, ‘आप एक चोर की तरह घर छोडक़र गए, आप तो एक मर्द भी नहीं हैं। आपके दिव्यता की खोज का सवाल कहां उठता है? आप एक शाही परिवार में जन्मे थे, आपके अंदर इतना साहस होना चाहिए था कि मेरा सामना करते और मुझसे लड़ते फि र अपनी मनमर्जी करते।

आठ सालों की खोज के बाद, जब उन्हें पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ तो उन्हें अपना एक छोटा सा दायित्व याद आया जो उन्हें पूरा करना था। जब उन्होंने महल छोड़ा था, तो उनका पुत्र एक शिशु ही था।

आप तो एक चोर की तरह भाग गए और अब वापस आकर दावा कर रहे हैं कि आपको ज्ञान प्राप्त हो गया है, आप बुद्ध हैं। मुझे इस तरह के फ र्जी ज्ञान में कोई दिलचस्पी नहीं है।’ उन्होंने यशोधरा से कहा, ‘देखो, जिस आदमी को तुम जानती थी, उसका अब अस्तित्व नहीं है। मैं सिर्फ इस दायित्व के कारण यहां आया हूं, जिसे मैं पूरा करना चाहता हूं। मैं तुम्हारा पति नहीं हूं, न ही इस बच्चे का पिता। मेरा सब कुछ बदल चुका है। हां, मैं अब भी उसी शारीरिक रूप में हूं, मगर मेरे अंदर सब कुछ बदल चुका है।’

फिर जैसा कि इमोशनल ड्रामा के समय होता है… यशोधरा ने बच्चे को उनके सामने रखा, बच्चा लगभग आठ साल का था। उन्होंने बच्चे को बुद्ध के सामने रखते हुए कहा, ‘इसके लिए आपकी क्या विरासत है? आप और आपकी आध्यात्मिक बकवास! आप इसे क्या देकर जाएंगे? इस बच्चे के लिए आपकी धरोहर क्या है?’ उन्होंने लडक़े को देखा, फिर अपने शिष्य आनंद को बुलाया, जो वहीं मौजूद था। वह बोले, ‘आनंद, मेरा भिक्षा पात्र लाओ।’ आनंद गौतम का भिक्षा पात्र ले कर आए, जो कुछ खास नहीं एक मामूली सा कटोरा था। गौतम बोले, ‘मेरी विरासत यही है, यह सबसे बड़ी विरासत है जो मैं अपने बेटे को सौंप सकता हूं।’ और उन्होंने वह भिक्षा पात्र अपने बेटे को सौंप दिया।

भगवान बुद्ध की ज्ञान की खोज तब शुरू हुई जब उन्होंने एक ही दिन तीन दृश्य दिखे – एक रोगी मनुष्य, एक वृद्ध और एक शव को उन्होंने देखा। बस इतना देखना था कि राजकुमार सिद्धार्थ गौतम निकल पड़े ज्ञान और बोध की खोज में…


एक बार बुद्ध कहीं प्रवचन दे रहे थे। अपने प्रवचन ख़त्म करते हुए उन्होंने आखिर में कहा, जागो, समय हाथ से निकला जा रहा है। सभा विसर्जित होने के बाद उन्होंने अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा, चलो थोड़ी दूर घूम कर आते हैं। आनंद बुद्ध के साथ चल दिए।अभी वे विहार के मुख्य दरवाजे तक ही पहुंचे थे कि एक किनारे रुक कर खड़े हो गए।

प्रवचन सुनने आए लोग एक- एक कर बाहर निकल रहे थे। इसलिए भीड़ सी हो गई थी| अचानक उसमे से निकल कर एक स्त्री गौतम बुद्ध से मिलने आई।। उसने कहा तथागत मै नर्तकी हूं| आज नगर सेठ के घर मेरे नृत्य का कार्यक्रम पहले से तय था, लेकिन मै उसके बारे में भूल चुकी थी। आपने कहा, समय निकला जा रहा है तो मुझे तुरंत इस बात की याद आई। उसके बाद एक डकैत बुद्ध की ओर आया। उसने कहा, तथागत मै आपसे कोई बात छिपाऊंगा नहीं। मै भूल गया था कि आज मुझे एक जगह डाका डालने जाना था कि आज उपदेश सुनते ही मुझे अपनी योजना याद आ गई। बहुत बहुत धन्यवाद!

उसके जाने के बाद धीरे धीरे चलता हुआ एक बूढ़ा व्यक्ति बुद्ध के पास आया। वृद्ध ने कहा, जिन्दगी भर दुनियादारी की चीजों के पीछे भागता रहा। अब मौत का सामना करने का दिन नजदीक आता जा रहा है, तब मुझे लगता है कि सारी जिन्दगी यूं ही बेकार हो गई। आपकी बातों से आज मेरी आंखें खुल गईं। आज से मै अपने सारे दुनियारी मोह छोड़कर निर्वाण के लिए कोशिश करना चाहता हूं। जब सब लोग चले गए तो बुद्ध ने कहा, देखो आनंद! प्रवचन मैंने एक ही दिया, लेकिन उसका हार किसी ने अलग अलग मतलब निकाला। जिसकी जितनी झोली होती है, उतना ही दान वह समेत पाता है। निर्वाण प्राप्ति के लिए भी मन की झोली को उसके लायक होना होता है। इसके लिए मन का शुद्ध होना बहुत जरूरी है।



एक बार बुद्ध से उनके एक शिष्य ने पूछा, भगवन आपने आज तक यह नहीं बताया कि मृत्यु के बाद क्या होता है। उसकी बात सुनकर बुद्ध मुस्कुराए, फिर उन्होंने उससे पूछा, पहले मेरी एक बात का जबाव दो। अगर कोई कहीं जा रहा हो और अचानक कहीं से आकर उसके शरीर में एक जहर भरा तीर लग जाए तो उसे क्या करना चाहिए। पहले शरीर में घुसे तीर को हटाना ठीक रहेगा या फिर देखना कि बाण किधर से आया है और किसे लक्ष्य कर मारा गया है।

शिष्य ने कहा, पहले तो शरीर में घुसे तीर को तुरंत निकालना चाहिए,नहीं तो जहर पूरे शरीर में फ़ैल जाएगा। बुद्ध ने कहा, बिल्कुल ठीक कहा तुमने, अब यह बताओ कि पहले इस जीवन के दुखों के निवारण का उपाय किया जाए या मृत्यु की बाद की बातों के बारे में सोचा जाए।शिष्य अब समझ चुका था और उसकी जिज्ञासा शांत हो गई।

Friday, 6 April 2018

दलित आंदोलन से सकपकाई, केंद्र सरकार

दलित आंदोलन से सकपकाई, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. लेकिन लगता है सरकार देर से हरकत में आई. तब तक आंदोलन जोर पकड़ चुका था. वैसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खबरों के मुताबिक इस मामले में फौरन सुनवाई से मना कर दिया है. केंद्र ने ये सफाई भी दी है कि दलितों और अल्पसंख्यकों के आरक्षण के प्रावधान को हटाने का उसका कोई इरादा नहीं है. इस बीच उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बंद के दौरान हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ हुई. धारा 144, कर्फ्यू और इंटरनेट सेवाओं पर रोक की नौबत आ गई. चार लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की खबरें भी मीडिया में आई हैं. पंजाब, ओडीशा, दिल्ली, बिहार और झारखंड को आने जाने वाली कई ट्रेनें रोकी गईं. दलित संगठनों के इस आंदोलन की तपिश ने सत्ता राजनीति के हाथ पांव फुला दिए हैं. ये सरकारी मशीनरी को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि ये आंदोलन इतनी तेजी और सघनता से फैल सकता है. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों लगता है पूरी तरह मुस्तैद नहीं थे.

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अपने एक फैसले में कहा था कि एससी-एसटी अधिनियम के तहत पब्लिक सर्वेंट की गिरफ्तारी, एपॉयंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती है. आम लोगों को भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की मंजूरी के बाद ही इस मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है. इस कानून के तहत इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को शिकायत के आधार पर तुरंत गिरफ्तार कर लिये जाने का प्रावधान था. दलित समुदाय इस फैसले से आहत है. उसके मुताबिक ये एक तरह से कानून को लचीला बनाने की कोशिश थी और उसे डर है कि दलितों पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ेगी और उन्हें जैसे मर्जी धमकाया जाएगा. मानवाधिकार संगठनों और कई गैर बीजेपी दलों ने भी इस फैसले की आलोचना की थी और सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए थे. खुद बीजेपी के भीतर से दलित नेताओ ने फैसले के खिलाफ एक सुर में आपत्ति जताई थी. जाहिर है ये उनका वोट की राजनीति का भी डर था.
कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी (प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटीज़) एक्ट को लेकर कहा था कि इन मामलों में तुरंत गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए और शुरुआती जाँच के बाद ही कार्रवाई होनी चाहिए.

दलित संगठन कोर्ट के इस फ़ैसले से नाराज़ हैं और उन्होंने इसके ख़िलाफ़ भारत बंद का आह्वान किया था.

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के विरोध में सोमवार को कई दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया.

भारत बंद को कई राजनीतिक दलों और कई संगठनों ने समर्थन भी दिया है. संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पहले की तरह लागू किया जाए.

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के विरोध में भारत के कई हिस्सों में भारत बंद के दौरान दलितों ने प्रदर्शन किया और इस दौरान कई राज्यों में हिंसा भी हुई.

बता दें कि लुधियाना में दलितों की अच्छी आबादी है और इसी वजह से प्रशासन सचेत है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट-1989 में बदलाव करते हुए गैर जमानतीय धाराओं को कमजोर कर दिया है। अब कोर्ट की जगह आरोपी को थाने से भी जमानत मिल सकती है। इस बदलाव के खिलाफ देशभर के दलित संगठनों ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अनुरोध किया था। दलित संगठनों की अगुवा संस्था नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ दलित आदिवासी ऑर्गनाइजेशन के अशोक भारती ने आज (01 अप्रैल को) संसद घेराव का कार्यक्रम भी रखा था। इस बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आंदोलनकारियों से आंदोलन वापस लेने की अपील की थी। दलित संगठनों की मांग है कि संशोधन को वापस लेकर पहले की ही तरह एससी-एसटी कानून को लागू किया जाय।


एससी-एसटी एक्ट पर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह जल्द ही इस मसले पर सुनवाई करेगा। वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि दलित आंदोलन और भारत बंद के चलते देश में हालात बहुत कठिन है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए
SC/ ST के खिलाफ अपराध लगातार जारी है आंकडें बताते हैं कि कानून के लागू करने में कमजोरी है न कि इसका दुरुपयोग हो रहा है। बता दें कि जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यू यू ललित की बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अग्रिम जमानत का आदेश दिया था।

केंद्र ने अपनी पुनर्विचार याचिका में यह भी कहा है कि अगर अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार के तहत आरोपी के अधिकारों को सुरक्षित करना महत्वपूर्ण है तो SC/ ST समुदाय के लोगों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 और छूआछात प्रथा के खिलाफ अनुच्छेद 17 के तहत सरंक्षण जरूरी है।
अगर आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई तो वो पीडित को आतंकित करेगा और जांच को रोकेगा. 

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट शाहिद अली ने सोशल मीडिया के जरिए सभी बहुजनों से अपील किया हैं कि 2 अप्रैल के भारत बंदी में जिसे भी पुलिस ने झूठे मुकदमे में फसाया गया हैं. उसकी पैरवी यूनाइटेड मुस्लिम्स फ्रंट के अधिवक्ता मुफ्त में करेंगे.

एडवोकेट शाहिद अली ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि SC/ST/OBC समाज के सभी भाई और बहनों, जिनका भी भारत बंद के दौरान झुठे मुकदमों में नाम आया हैं,उन सभी का केस यूनाइटेड मुस्लिम्स फ्रंट के अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगे और वो भी निःशुल्क!!!
एडवोकेट शाहिद अली का इस तरह का फैसला पहला नहीं हैं, इससे पहले भी उन्होंने बहुत सारे गरीब जरुरतमंदों की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी मुफ्त में की है.



Thursday, 5 April 2018

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जीवन

अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम (अंग्रेज़ी:Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam; जन्म: 15 अक्तूबर, 1931, रामेश्वरम; मृत्यु: 27 जुलाई, 2015शिलांग) जिन्हें डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के नाम से जाना जाता है, भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रसिद्ध वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में विख्यात थे। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई, 2002 से 25 जुलाई,2007 तक रहा। उन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। वह एक गैर राजनीतिक व्यक्ति रहे। विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण ही राष्ट्रपति भवनके द्वार उनके लिए स्वत: खुल गए। जो व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, उसके लिए सब सहज हो जाता है और कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता। अब्दुल कलाम इस उद्धरण का प्रतिनिधित्व करते नज़र आते थे। उन्होंने विवाह नहीं किया था। उनकी जीवन गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक की कहानी से कम नहीं है। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत था कि वह सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्ति नज़र आते थे। वह एक ऐसे स्वीकार्य भारतीय थे, जो सभी के लिए 'एक महान् आदर्श' बन चुके हैं। विज्ञान की दुनिया से देश का प्रथम नागरिक बनना कपोल कल्पना मात्र नहीं है, क्योंकि यह एक जीवित प्रणेता की सत्यकथा है।



द्वीपजैसा छोटा सा शहर प्राकृतिक छटा से भरपूर था। शायद इसीलिए अब्दुल कलाम जी का प्रकृति से बहुत जुड़ाव रहा था।

कलाम जी का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को धनुषकोडी गांव, रामेश्वरम, तमिलनाडु में मछुआरे परिवार में हुआ था, वे तमिल मुसलमान थे. इनका पूरा नाम डॉक्टर अवुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम है. इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था. वे एक मध्यम वर्गीय परिवार के थे. इनके पिता अपनी नाव मछुआरों को देकर घर चलाते थे. बालक कलाम को भी अपनी शिक्षा के लिए बहुत संघर्ष करना पढ़ा था. वे घर घर अख़बार बाटते और उन पैसों से अपने स्कूल की फीस भरते थे. अब्दुल कलामजी ने अपने पिता से अनुशासन, ईमानदारी एवं उदार स्वभाव में रहना सिखा था. इनकी माता जी ईश्वर में असीम श्रद्धा रखने वाली थी. कलाम जी के 3 बड़े भाई व् 1 बड़ी बहन थी. वे उन सभी के बहुत करीब रिश्ता रखते थे.

किशोरावस्था में अब्दुल कलाम

रामेश्वरम का प्राकृतिक सौन्दर्यसमुद्र की निकटता के कारण सदैव बहुत दर्शनीय रहा है। उनके पिता'जैनुलाब्दीन' न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। वे नाविक थे, और नियम के बहुत पक्के थे। उनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। उनके संबंध रामेश्वरम के हिन्दू नेताओं तथा अध्यापकों के साथ काफ़ी स्नेहपूर्ण थे। अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था।



एक विलक्षण व्यक्तित्व हमेशा के लिए अलविदा कह गया. भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे. शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा. आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं कर सके. 83 वर्ष केकलाम साथ छोड़ चुके थे .

एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था. एक मछुआरे का बेटा अखबार बेचा करता था. यह कलाम के जीवन का शुरुआती सफर था. वे देश के चोटी के वैज्ञानिक बने और फिर सबसे बड़े राष्ट्रपति पद को भी शोभायमान किया. वे करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे. अपनी वाक कला से हजारों की भीड़ को मंत्र-मुग्ध करते रहे. युवाओं में नया करने का जोश और हौसला भरते रहे. दो दर्जन किताबों में अपने अनुभव का निचोड़ पेश किया. लेकिन अंत तक ट्विटर प्रोफाइल पर खुद को एक 'लर्नर' बताते रहे.

ट्विटर पर उनका परिचय इस तरह है, 'साइंटिस्ट, टीचर, लर्नर, राइटर. भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में सेवाएं दीं. 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहा हूं.'

जानिए कलाम के बारे में 10 खास बातें:

1. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ.

2. पेशे से नाविक कलाम के पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे. ये मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे. पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे इसलिए शुरुआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम भी करना पड़ा.

4. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बचे उठते थे और नहा कर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे. सुबह नहा कर जाने के पीछे कारण यह था कि प्रत्येक साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे. ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और इसके बाद वो सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे.

5. कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताते हैं. वो कहते हैं, ‘वो हमारे अच्छे टीचर्स में से थे. एक बार उन्होंने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है? क्लास के किसी छात्र ने इसका उत्तर नहीं दिया तो अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए. वहां कई पक्षी उड़ रहे थे. कुछ समुद्र किनारे उतर रहे थे तो कुछ बैठे थे. वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को समझाया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार पूर्वक बताया जो उड़ने में सहायक होता है. उनके द्वारा समझाई गई ये बातें मेरे अंदर इस कदर समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होने लगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर हूं और उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी. बाद में मैंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना करियर बनाउं. मैंने बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की.’

6. 1962 में कलाम इसरो में पहुंचे. इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया. 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया. उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं.

7. 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे. इस दौरान वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया. कलाम ने विजन 2020 दिया. इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई. कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे.

8. 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया. उसी दौरान अन्ना यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया. कलाम ने तब रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया. स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई.

9. इसके पहले चरण में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल बनाने पर जोर था. दूसरे चरण में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल, टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहिकल (रेक्स) बनाने का प्रस्ताव था. पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए गए. कलाम ने अपने सपने रेक्स को अग्नि नाम दिया. सबसे पहले सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का परीक्षण किया गया. इसके बाद 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई. ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र कहीं भी दागी जा सकती है. इस सफलता के साथ ही कलाम को मिसाइल मैन के रूप में प्रसिद्धि मिली और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

10. कलाम को 1981 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया. भारत के सर्वोच्च पर पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया.

सत्तर और अस्सी के दशक में अपने कार्यों और सफलताओं से डॉ कलाम भारत में बहुत प्रसिद्द हो गए और देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में उनका नाम गिना जाने लगा। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गयी थी की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने कैबिनेट के मंजूरी के बिना ही उन्हें कुछ गुप्त परियोजनाओं पर कार्य करने की अनुमति दी थी।

भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का प्रारम्भ डॉ कलाम के देख-रेख में किया। वह इस परियोजना के मुख कार्यकारी थे। इस परियोजना ने देश को अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें दी है।

जुलाई 1992 से लेकर दिसम्बर 1999 तक डॉ कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सचिव थे। भारत ने अपना दूसरा परमाणु परिक्षण इसी दौरान किया था। उन्होंने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आर. चिदंबरम के साथ डॉ कलाम इस परियोजना के समन्वयक थे। इस दौरान मिले मीडिया कवरेज ने उन्हें देश का सबसे बड़ा परमाणु वैज्ञानिक बना दिया।

वर्ष 2011 में प्रदर्शित हुई हिंदी फिल्म ‘आई ऍम कलाम’ उनके जीवन से प्रभावित है।

शिक्षण के अलावा डॉ कलाम ने कई पुस्तकें भी लिखी जिनमे प्रमुख हैं – ‘इंडिया 2020: अ विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘विंग्स ऑफ़ फायर: ऐन ऑटोबायोग्राफी’, ‘इग्नाइटेड माइंडस: अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’, ‘मिशन इंडिया’, ‘इंडोमिटेबल स्पिरिट’ आदि।

पुरस्कार और सम्मान

देश और समाज के लिए किये गए उनके कार्यों के लिए, डॉ कलाम को अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। लगभग 40 विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया।
इस महान पुरुष  का जितना बखान किया जाये उतना कम है
इनकी  आलोचना करने वाला जिंदगी में कोई नहीं मिलेगा
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Wednesday, 4 April 2018

दो शब्द Er richpal rokna के नाम

मेरे प्यारे रिछपाल रोकणा

सबसे पहले तो तुम्हें मेरा यह फिटे लांत

चुतिया सोच सपना IAS
कहां से होगा सक्सेस
जिसकी चुतिया सोच  चुतिया  औकात
वही करेगा चुतिया बात


 एक होती है लोल
 एक होती है बगलोल
एक होती है रबड़ लोल
लोल हर जगह देखने को मिलती है बगलोल कहीं कहीं देखने को मिलती है
रबड़ लोल बड़ी मुश्किल से ढूंढने पर एक गांव में एक मिलती है
और उसी रबडलोल का नाम है
Er richpal rokna

पहले तू यह बता तेरी किस किस के साथ बनती है किसके साथ बना कर रखी है तूने
 पहले अपने गिरेबान में झांक उस
 उसके बाद दूसरों के गेट बंद करने की बात कर


दूसरों में कमियां निकालते हो खुद एक टीचर होकर bhai की स्पेलिंग सही नहीं लिख सकते
 ढकनी में नाक दबा कर मर जाओ
तु जिस फ्लेक्स में भीम के नाम मे मात्रा गलत बता रहा है वह फ्लेक्स वाले की गलती है




 ना की भीम समर्थकों की फ्लेक्स वाला तेरे जैसा ही होगा
तुम वार्ड पंच के लायक भी नहीं हो



Tuesday, 3 April 2018

दलित संगठनों का भारत बंद: बीजेपी का बड़ा नुकसान बन जाएगा एससी-एसटी एक्ट

जय भीम साथियों
2 अप्रैल को भारत बंद के मौके पर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है. बिहार से लेकर झारखंड तक, मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक, पंजाब से लेकर यूपी तक हर जगह हिंसा और आगजनी देखने को मिल रही है. राज्य अलग-अलग लेकिन, हर जगह की तस्वीर एक जैसी. हो-हंगामा, कहीं पुलिस के साथ झड़प तो कहीं बंद समर्थक और विरोधी गुटों के बीच झड़प. आगजनी, तोड़फोड़ और हंगामे ने पूरे देश भर में बवाल मचाया हुआ है. मध्य प्रदेश में तो बंद के दौरान हुई हिंसा में कई मौत भी हो गई है.

देशभर के दलित संगठनों की तरफ से बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला. दलित संगठनों का बंद सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश दिया गया था. अबतक इस तरह के केस में अग्रिम जमानत नहीं मिलती थी. लेकिन, कोर्ट ने इस तरह के मामले में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी देने का आदेश दिया. यानी अब पुलिस को भी आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले इन मामलों की जांच करनी पड़ेगी.

क्या बदलाव हुए हैं कानून में

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के मामले में था. लेकिन, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर गैर-सरकारी किसी कर्मी से जुड़ा इस तरह का मामला सामने आए तो फिर उस मामले में सबसे पहले उस जिले के एसएसपी से मंजूरी लेनी पड़ेगी, तभी आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकेगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दलितों के हितों के संरक्षण को लेकर बनाए गए कानून अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कमजोर होने की बात कही जा रही है. खासतौर से दलित संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से दलितों की आवाज दबाई जाएगी. दलित संगठनों का गुस्सा इसी बात को लेकर है.
. सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद से ही कांग्रेस समेत कई दूसरे दलों ने सरकार पर इस मामले में ठीक तरह से अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखने का आरोप लग रहा है. कोशिश मोदी सरकार को दलित विरोधी बताने की हो रही है


Bharat Bandh Today UPDATES:

– बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें रोक दी और हंगामा किया। बेतिया स्टेशन पर समर्थकों ने तोड़फोड़ की तथा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफरपुर सहित विभिन्न जिलों में लोग सड़क जामकर सड़कों पर आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। बेतिया में बंद समर्थकों ने एक पेट्रोल पंप में तोड़फोड़ की।

– दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विभिन्न दलित संगठनों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्पन्न हुई स्थिति पर ‘आप’ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय का समर्थन करती है। केंद्र सरकार को अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका के लिए प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ वकीलों की मदद लेनी चाहिए।”
मनुस्मृति क्यों जलाई गई पढें
– मध्‍य प्रदेश के आईजी (कानून-व्‍यवस्‍था) ने मीडिया से 4 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। उन्‍होंने घायलों की संख्‍या स्‍पष्‍ट नहीं की। आईजी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।



– बसपा सुप्रीमो मयावती ने कहा कि मैं एससी / एसटी एक्ट के खिलाफ विरोध का समर्थन करती हूं।

– हरियाणा के यमुनानगर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया है। दरअसल काफी प्रदर्शनकारी एक साथ सड़क पर आ गए थे, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया।



– प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में गुरुग्राम एक्सप्रेस वे को ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी गुरुग्राम के सदर बाजार में भी रैली निकाल रहे हैं। >सुप्रीम कोर्ट में SC/ST एक्ट में बदलाव पर लिए गए फैसले का तत्काल रिव्यू करने से मना कर दिया है।

– भिंड के पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे ने कहा कि भिंड जिले में सेना को बुलाया गया, जहां प्रदर्शनकारियों द्वारा गोलीबारी में छह लोग घायल हो गए। सेना और अर्धसैनिक बलों को पंजाब में एहतियाती तौर पर स्टैंडबाय पर रहने के लिए कहा गया है।

– यूपी के आजमगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने यूपी रोडवेज की बस को आग के हवाले कर दिया। पहले बस में तोड़ फोड़ की गई। बस के सारे शीशे तोड़ दिए और फिर बस में आग लगा दी।

– भारत बंद से जुड़े प्रदर्शन हिंसक होते जा रहे हैं। मप्र के ग्वालियर में अब तक 19 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें दो की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। शाम छह बजे तक के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। (फोटोः एएनआई)

– मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एससी/एसटी प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान गोलियां चल गईं। बीच बाजार में एक शख्स पिस्तौल से गोली चलाता देखा गया, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल पनप गया।

– गुजरात के कच्छ स्थित गांधीधाम में भी आगजनी की गई। भारी संख्या में जुटकर दलित महिला ने भारत बंद का समर्थन किया। कच्छ में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ कर दी है। कच्छ में महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। वह सड़को पर ही बैठ गई हैं। इसके अलावा कच्छ के गांधीधाम में ही प्रदर्शनकारियों ने आग लगाकर भी विरोध प्रदर्शन किया है।

– होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि “हमने सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर की है। मैं सभी राजनीतिक दलों और समूहों से शांति बनाए रखने और हिंसा नहीं भड़काने के लिए अपील करता हूं।”

– गाजियाबाद में भी प्रदर्शन का असर देखने को मिल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। यूपी के हापुड़ में कार फूंकी। इसके अलावा उत्तराखंड के देहरादून में प्रदर्शनकारियों ने जाकर जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद कराईं। मध्य प्रदेश के ग्वालिय के चार थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लग गया है। वहीं मेरठ में भी प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस चौकी फूंक दी है। मध्य प्रदेश में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए।

– जयपुर में प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। जयपुर एक शोरूम में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोक कर दी। शोरूम का शीशा तोड़ दिया। इसके अळावा जयपुर में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर उसके सामने खडे़ होकर और ट्रेन के इंजन पर चढ़कर प्रदर्शन किया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मध्यप्रदेश के मुरैना में भी रेलवे ट्रेक को ब्लॉक कर दिया है।



– रांची में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क जाम कर रहे थे। पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी इसी को लेकर दोनों के बीच भिडंत हो गई।

– सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब राजस्थान में भी विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है। गाड़ियों समेत दूसरी प्रॉपर्टी फूंक दी हैं। इसके अलावा राजस्थान के ही भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं।

– मेरठ में हिंसक हुआ SC/ST एक्ट को लेकर विरोध प्रदर्शन। यूपी के मेरठ में भारत बंद को लेकर रोड पर तोड़फोड़। रोड पर जा रही होंडा सिटी और i20 कार के शीशे तोड़े। लोगों को चोट भी आई। दिल्ली के मंडी हाउस पर भी हो रहा भारत बंद को लेकर विरोध प्रदर्शन।

– यूपी के आगरा में प्रदर्शनकारियों ने लगाया जाम। इसके अलावा राजस्थान के भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं। वह लाठी डंडों के साथ सड़क पर बैठी हैं। पंजाब के अमृतसर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री थावर चंद्र गहलोत ने कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं तब तक एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों से कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता।

SC/ST एक्ट को लेकर बिहार के आरा में CPIML समेत कई संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी। इसके रेलवे फाटक पर टायर डालकर आगजनी भी की। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने बिहार के सोनापुर में रोड ब्लॉक कर दी। भारत बंद का भोजपुर में भी असर दिख रहा है। यहां सड़कों पर सन्नटा पसरा हुआ है। सभी दुकानें बंद हैं और परिचालन भी ठप हो गया ह‍

एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित संगठनों ने सोमवार को देशभर में प्रदर्शन किया, धीरे-धीरे यह हिंसक होता चला गया. भारत बंद के आह्वान पर देश के अलग-अलग शहरों में दलित संगठन और उनके समर्थकों ने ट्रेन रोकीं और सड़कों पर जाम लगाया. उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में तोड़फोड़, जाम और आगजनी की घटनाएं सामने आई, लेकिन जान-माल का काफी नुकसान भी हुआ.

देशभर में भड़की हिंसा में एक बच्चे समेत 11 लोगों की जान चली गई. मध्यप्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में दिनभर स्थिति बेहद खराब रही और लोगों ने जमकर हंगामा किया. विरोध प्रदर्शन के कारण एमपी में 7, उत्तर प्रदेश में 2 और राजस्थान में 1 व्यक्ति की मौत हो गई. बाडमेर में एक हिंसक झड़प में 25 लोग घायल हो गए.

दूसरी ओर, बिहार में भारत बंद के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में 3,619 लोगों को गिरफ्तार किया गया. गाजियाबाद में हंगामे को देखते हुए सभी स्कूलों में मंगलवार (3 अप्रैल) को छुट्टी कर दी गई है.



देश के कई शहरों में पुलिस थानों को भी निशाना बनाया गया है. साथ ही सरकारी वाहनों में आगजनी की गई. प्रदर्शनकारियों के बवाल के चलते कई रूट पर ट्रेनें चल नहीं पाईं. साथ ही कई हाईवे घंटों तक जाम रहे.

ध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार (2 अप्रैल) को भारत बंद के समर्थन में बोले। उन्होंने इसी के साथ सड़क पर उतरने वाले दलितों को सलाम किया। उन्होंने कहा, "दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डीएनए में है। जो इस सोच को चुनौती देता है, उसे वे हिंसा से दबाते हैं।" कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, "हजारों दलित भाई-बहन आज सड़क पर उतरकर नरेंद्र मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग उठा रहे हैं। हम उन सभी को सलाम करते हैं।" आपको बता दें कि दलित संगठनों ने आज (2 अप्रैल) भारत बंद बुलाया है। ऐसा एससी-एसटी एक्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसले को लेकर हुआ है। छह राज्यों में बड़े स्तर पर इसका असर देखने को मिला, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में हिंसक प्रदर्शन भी हुए। खबर लिखे जाने तक 5 की मौत और 30 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी है।

पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) मकरंद देऊस्कर ने बताया, ‘बंद प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में ग्वालियर में दो, भिण्ड में एक और मुरैना में एक व्यक्ति की मौत हो गई.’

उन्होंने बताया कि मरने वाले लोगों की पहचान राकेश जाटव, दीपक जाटव (ग्वालियर), महावीर राजावत (भिण्ड) और राहुल पाठक (मुरैना) के तौर पर हुई है
जय भीम  जय भारत 

Sunday, 1 April 2018

2 अप्रैल के भारत बंद को 22 संगठनों का समर्थन

जय भीम  जय भारत
एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के कुछ प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के विरोध में भीम आर्मी ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया है। प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक राज ने कहा कि एससी-एसटी सहित ओबीसी के 22 संगठनों ने बंद का समर्थन किया है। इसकी सफलता के लिए संत रविदास आश्रम में बैठक हुई। मांग की गई कि निष्प्रभावी किए गए प्रावधानों को फिर से लागू कराया जाए, ताकि एससी-एसटी को न्याय मिल सके। बैठक में अमरजीत कुमार राम, त्रिलोकी मांझी, सुरेंद्र महान, विनोद कुमार मरांडी, चंदन कुमार, मनोज कुमार, दिनेश कुमार आदि मौजूद थे।

SC-ST एक्ट में बदलाव के खिलाफ लोग उतरेंगे सड़कों पर, 2 अप्रैल को भारत बंद का किया एलान
 तमाम सामाजिक संगठन, दलित संगठन और दलित समाज से जुड़े लोगों ने दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है। इनका आरोप है कि SC-ST अत्याचार निरोधक अधिनियम को कमजोर किया गया है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में कुछ बड़े बदलाव किए।

कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता दो अप्रैल को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने वाले हैं। वरिष्ठ पत्रकारदिलीप मंडल ने अपनी फेसबुक डीपी बदलकर इस प्रदर्शन का समर्थन किया है।


छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एससी-एसटी एक्ट मामला समेत जिले की 16 सूत्री मांगों को लेकर आगामी 2 अप्रैल को कांग्रेस की विशाल रैली है. आपको बता दें कि कांग्रेस की रैली में कांग्रेस उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा समेत बस्तर के विधायक भी शामलि होंगे.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने के विरोध में कई सामाजिक संगठन सामाने आ गए हैं. संशोधन को समाप्त कर एक्ट को पहले की भांति रखने की मांग की जा रही है. अनुसूचित जाति और अनुसचित जनजाति के लोग इस एक्ट को शिथिल करने के विरोध में आगामी 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है.

वहीं मामले में उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा भी भारत बंद का समर्थन करते हुए क्षेत्र की 16 अन्य मांगों को लेकर जिला मुख्यालय में रैली और महासभा का आयोजन रखा है. इसमें बस्तर संभाग के विधायक समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. कवासी लखमा का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है.

उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा का कहना है कि आगामी 2 अप्रैल को सबसे पहले बस्तर संभाग के सुकमा जिले में कांग्रेस की विशाल रैली का आयोजन होगा. इसमें वे राज्यपाल के नाम से जिले के 16 सूत्री मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपेगे.

दो अप्रैल को बंद कराया जाएगा केयू

कुरुक्षेत्र। एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया है। इसी को लेकर शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय के डॉॅ. भीम राव अंबेडकर स्टडी सेंटर में अंबेडकरवादी छात्र संगठनों, डॉ. अंबेडकर अनुसूचित कर्मचारी संघ, डॉ. अंबेडकर अनुसूचित शिक्षक संघ की सामूहिक बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया की भारत बंद को ध्यान में रखते हुए विश्विद्यालय को बंद कराया जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाते हुए जवाहर लाल नेहरू लाइब्रेरी के सामने शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन करते हुए विश्विद्यालय बंद कराया जाएगा। इसके साथ ही डॉ. आंबेडकर चौक तक रोष मार्च निकाला जाएगा। इस मौके पर अंबेडकरवादी छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, कर्मचारी संघ, शिक्षक संघ के पदाधिकारी मौजूद थे।



 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के संबंध में उच्चत्तम न्यायालय के फैसले के विरोध में संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है। समिति के प्रधान कुलवंत सिंह भरोमाजरा ने आज अन्य संगठनों के नेताओं सहित एक संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि डा. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के उत्थान को ध्यान में रख कर भारत के संविधान का निर्माण किया था। 
उन्होंने कहा कि केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी साजिश के तहत संविधान की धाराओं के साथ छेड़छाड़ कर रही है जिसके कारण देश भर में डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर बनी दलित सभाओं में भारी रोष उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उच्चत्तम न्यायालय ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो दो अप्रैल को देश भर में बंद कर शांतिमय धरना- प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने सभी राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक तथा व्यापारिक संगठनों से भारत बंद को सफल बनाने की अपील की है।  इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष महिन्द्र सिंह, वरिष्ठ उपप्रधान संत देस राज गोविंदपुरा, महासचिव निर्मल सिंह, अखिल भारतीय आदि मिशन पंजाब के प्रधान मदन लाल रंधावा, अंबेडकर सेना और सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान चंदन ग्रेवाल उपस्थित थे। 
सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ सोमवार को घोषित भारत बंद का कई संगठनों ने समर्थन किया है. इसके तहत कई पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतरेंगे. संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पूर्व की तरह लागू किया जाए.
SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ खड़े हुए झारखंड के दर्जनों संगठन, 2 अप्रैल को भारत बंद, अलर्ट जारी
 एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों को शिथिल करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों और उससे जुड़े संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया है. बंद को झारखंड के दर्जनों सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल गया है. रविदास जयंती पर आयोजित होने वाले इस भारत बंद को लेकर खुफिया विभाग ने झारखंड सरकार को अलर्ट किया है.

आदिवासी छात्र संघ, रांची विश्वविद्यालय के अध्‍यक्ष संजय महली ने कहा है कि 2 अप्रैल का बंद ऐतिहासिक होगा. बंद को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार कर ली गयी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए छोटे-छोटे समूह बनाये गये हैं,  जो विभिन्‍न इलाकों में बंद को सफल बनाने के लिए सड़क पर उतरेंगे.
2  अप्रैल को भारत बंद में शामिल होगी नगर निगम सफाई मजदूर यूनियन
नगर निगम सफाई मजदूर यूनियन (रजि.) फगवाड़ा ने एस.सी./एस.टी. एक्ट के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए फैसले के रोष स्वरूप 2 अप्रैल को विभिन्न संगठनों द्वारा किए जा रहे भारत बंद में शामिल होने का ऐलान किया है।

यहां नगर निगम कमिश्नर को इस हड़ताल संबंधी लिखित पत्र देकर अवगत करवाने के उपरांत यूनियन के प्रधान रोशन लाल सेठी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय का एस.सी./एस.टी. एक्ट को लेकर दिया गया फैसला पीड़ादायक है। इसके खिलाफ सख्त कानून बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि उक्त हड़ताल में सफाई मजदूर यूनियन के अलावा म्यूनिसिपल सफाई कर्मचारी यूनियन इंटक भी शामिल होगी। 
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